दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से संपर्क रखने पर बर्खास्त बीएसएफ कॉन्स्टेबल को बहाल करने की याचिका की खारिज
न्यायमूर्ति मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता कांस्टेबल की उसकी नौकरी बहाल करने की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह सफाई कि वह इन मोबाइल फोन का उपयोग अपने घरवालों से बात करने के लिए करता था और एक मोबाइल वह मरम्मत कराने और दूसरा फोन अपने बेटे के लिए खरीदा था, पूरी तरह मनगड़ंत हैं।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (पीआईओ) से साल 2018 से संपर्क के आरोप में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) कांस्टेबल को बर्खास्त करने के मामले में दखल देने से इंकार करते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात आरोपी के पास से चार मोबाइल फोन और पांच सिम कार्ड बरामद हुए थे।
न्यायमूर्ति मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता कांस्टेबल की उसकी नौकरी बहाल करने की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उसकी यह सफाई कि वह इन मोबाइल फोन का उपयोग अपने घरवालों से बात करने के लिए करता था और एक मोबाइल वह मरम्मत कराने और दूसरा फोन अपने बेटे के लिए खरीदा था, पूरी तरह मनगड़ंत हैं।
पीठ के सदस्य नवीन चावला ने कहा कि याचिकाकर्ता के दावे कि उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है, को भी नहीं माना जा सकता और बर्खास्तगी की कार्रवाई करने से पहले प्राथमिक जांच करने के कारण विभाग के फैसले पर भी कोई शक नहीं है।
आरोपी 2002 में बीएसएफ में भर्ती हुआ था। उसे नवंबर 2020 में उन आरोपों के बाद नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था कि वह ड्यूटी पर मोबाइल फोन ले गया था और एक संदिग्ध पीआईओ से संपर्क किया था। बाद में आरोप लगा कि उसकी तलाशी लेने पर उसके पास से चार मोबाइल फोन और पांच सिम कार्ड बरामद हुए।
कोर्ट को बताया गया कि इसके बाद एक स्टाफ कोर्ट ऑफ इनक्वायरी (एससीओआई) ने पाया कि अन्य चीजों के अलावा याचिकाकर्ता कथित पीआईओ के साथ 2018 से संपर्क में था और मैसेंजर पर उससे लगातार बात करता था। वह उससे अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से पीआईओ से बात करता था। जिस दिन मोबाइल जब्त हुआ, उस दिन भी उसने पीआईओ से 8.46 मिनट बात की थी।