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Delhi High Court: वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी में लाने संबंधी याचिका पर सुनवाई, हाई कोर्ट ने कही यह बड़ी बात

Thu, 20 Jan 2022 10:38 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 20 Jan 2022 10:38 PM IST
सार

न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष न्याय मित्र रेबेका जॉन ने कहा शादी में यौन संबंधों की उचित अपेक्षा होती है। उम्मीद को दंडित नहीं किया जा सकता है। पति या पत्नी को नागरिक उपचार का सहारा लेने का अधिकार है। यदि अपेक्षा जबरदस्ती और बल के आधार पर एक शारीरिक क्रिया बन जाती है, तो वह यौन क्रिया एक अपराध बन जाएगी।

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Delhi high court comment on marital rape case says You cannot claim the right to have sex with a partner
फाइल फोटो - फोटो : PTI

विस्तार

उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा एक विवाह में चाहे हम यौन संबंधों की अपेक्षा कितनी भी ऊपर ले जाएं, आप साथी के साथ यौन संबंध रखने के अधिकार का दावा नहीं कर सकते हैं। अदालत ने वैवाहिक दुष्कर्म को अपराधीकरण की श्रेणी में लाने की मांग याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त टिप्पणी की।

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न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष न्याय मित्र रेबेका जॉन ने कहा शादी में यौन संबंधों की उचित अपेक्षा होती है। उम्मीद को दंडित नहीं किया जा सकता है। पति या पत्नी को नागरिक उपचार का सहारा लेने का अधिकार है। यदि अपेक्षा जबरदस्ती और बल के आधार पर एक शारीरिक क्रिया बन जाती है, तो वह यौन क्रिया एक अपराध बन जाएगी।
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उन्होंने कहा वैवाहिक रिश्ते में हर आदमी को दंडित करने की मांग नहीं की जाती। रिश्ते में हर कार्य को दंडित करने की मांग नहीं की जाती। पत्नी के साथ उसकी सहमति के खिलाफ यौन संबंध बनाने के कार्य को कानून के दायरे में लाने की मांग की जा रही है।
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अदालत ने कहा कि यदि कानून लैंगिक रूप से तटस्थ हो तो क्या यह असंवैधानिक हो सकता है। पीठ ने न्याय मित्र अधिवक्ता रेबेका जॉन से कहा मान लीजिए कि आईपीसी की धारा 375 (दुष्कर्म की परिभाषा) लैंगिक रूप से तटस्थ है और यह अपवाद कहता है कि जब दो पक्ष विवाहित हैं। आपके मुताबिक क्या अपवाद तब भी असंवैधानिक होगा।

अदालत के सवाल पर अधिवक्ता जॉन ने कहा वे शुक्रवार को इसका जवाब देने की कोशिश करेंगी। उन्होंने अपनी दलील में कहा वैवाहिक साथी के 'ना' का अवश्य ही सम्मान किया जाना चाहिए। दुष्कर्म खुद में एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि अपवाद-दो के तहत दी गई सुरक्षा अपवाद की प्रकृति में नहीं है बल्कि एक छूट है।

ऐसे में अपवाद दो को धारा से हटाया जाए। उन्होंने अपने तर्क के समर्थन में सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों का हवाला दिया। आईपीसी की धारा 375 में दिए गए अपवाद के तहत एक पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग या यौन कृत्य पत्नी की उम्र पंद्रह वर्ष से कम नहीं है तो दुष्कर्म नहीं है।

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