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दिल्ली: रुपये मिलने के बाद भी हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं कराया तो  कोर्ट ने दिया धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने का आदेश

Tue, 16 Nov 2021 06:12 PM IST
अनुराग सक्सेना पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Tue, 16 Nov 2021 06:12 PM IST
सार

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल ने शिकायतकर्ता अनीस अहमद द्वारा मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर यह आदेश दिया। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों निदेशकों और एक कर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की याचिका को खारिज कर दिया था।

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Delhi helicopter was not provided even after getting the money the court ordered to register a case of fraud
कोर्ट का आदेश। - फोटो : amar ujala

विस्तार

अदालत ने राजधानी स्थित एयर चार्टर सर्विस कंपनी के दो निदेशकों के खिलाफ कथित तौर पर पैसे मिलने के बावजूद एक व्यक्ति को हेलिकॉप्टर सेवा प्रदान करने में विफल रहने के लिए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि दोनों का याची को धोखा देने का इरादा था।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल ने यह आदेश शिकायतकर्ता अनीस अहमद द्वारा मजिस्ट्रेट के उस फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर दिया, जिसमें उनकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने से इंकार कर दिया था। याची का आरोप है कि मार्च 2019 में पांच लाख रुपये का भुगतान लेने के बाद उनकी भतीजी की शादी के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं करवाया गया। याची ने निदेशकों व एक कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी।
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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि निदेशक ने सेवा रद्द करने के बाद भुगतान की गई राशि वापस नहीं की और उसका फोन उठाना बंद कर दिया। इसके बाद उन्हें पता चला कि आरोपियों ने कार्यालय बंद कर दिया है। इतना ही नहीं एक आरोपी ने उसे धमकी भी दी। उन्होंने जामिया नगर थाने में और पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) के पास सितंबर और अक्टूबर 2019 में दो शिकायतें दर्ज कराईं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि विवाद दीवानी है और कोई प्रलोभन या ठगी नहीं हुई थी

जानबूझकर दिया गया धोखा
अदालत ने पुलिस के तर्क को खारिज करते हुए याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों निदेशकों का शुरुआत से ही याची अहमद को धोखा देने का इरादा था क्योंकि वे इस बारे में स्पष्टीकरण नहीं दे पाए कि राशि प्राप्त होने के बावजूद याची को कोई सेवाएं क्यों नहीं दी गईं।

सक्षम अधिकारी से अनुमति भी नहीं ली थी
अदालत ने कहा कि इसके अलावा आरोपी यह भी स्पष्ट कर पाए है कि उन्होंने याची को संबंधित समय पर हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रदान करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से अपेक्षित अनुमति प्राप्त की थी। उन्होंने कहा कि ठगी गई राशि की वसूली के लिए पुलिस द्वारा जांच की आवश्यकता होगी यह पता लगाने के लिए कि क्या आरोपी के पास उनके द्वारा किए गए वादे के अनुसार और प्रभावी जांच के लिए सेवाएं प्रदान करने की अपेक्षित अनुमति थी। उन्होंने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि याचिका स्वीकार करने का ठोस आधार है। अदालत ने संबंधित थानाध्यक्ष को दोनों निदेशकों के खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया है।

अपने कर्मचारी को भी दिया धोखा
अदालत ने कंपनी के कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देने से इंकार करते हुए कहा कि चार्टर सर्विस कंपनी के कर्मचारी को किसी आपराधिक दायित्व के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि निदेशकों ने उसे भी धोखा दिया था। इतना ही नहीं आरोपी निदेशकों ने कर्मचारी को पिछले छह महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया है। अदालत ने पुलिस को इसकी भी जांच करने का निर्देश दिया है।

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