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Delhi HC: दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब, 22 मई को सुनवाई

Wed, 15 Mar 2023 08:30 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 15 Mar 2023 08:30 PM IST
सार

केंद्र के अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि ई-फाम्रेसी को विनियमित करने के लिए नियम बनाने के प्रस्ताव पर मंथन चल रहा है, कुछ समय और दिया जाए। पीठ ने फिर उन्हें समय प्रदान कर दिया।

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Delhi HC Seeks response central government on demand ban illegal online sale medicines
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा एवं न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने इसके साथ ही सुनवाई 22 मई के लिए स्थगित कर दी है।

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केंद्र के अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि ई-फाम्रेसी को विनियमित करने के लिए नियम बनाने के प्रस्ताव पर मंथन चल रहा है, कुछ समय और दिया जाए। पीठ ने फिर उन्हें समय प्रदान कर दिया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि पांच-छह सालों से नियम बनाए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस काम नहीं किया गया है।

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कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिसमें दवाओं की ऑनलाइन अवैध बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का की मांग करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की प्रकाशित मसौदा नियमों को चुनौती दी गई है, जिससे औषधि एवं प्रसाधन नियमों में संशोधन किया जा सके। मंत्रालय की अगस्त, 2018 की अधिसूचना को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता एसोसिएशन ‘साउथ केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन’ ने कहा कि कानून का गंभीर उल्लंघन करके मसौदा नियमों को प्रकाशित किया जा रहा है। उसने कहा कि बगैर उचित विनियमन के दवाओं की ऑनलाइन बिक्री से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरे को नजरअंदाज किया जा रहा है।

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याचिकाकर्ता जहीर अहमद ने हाईकोर्ट के मना करने के बावजूद इस तरह की गतिविधि पर रोक लगाने के बदले ऑनलाइन दवाओं की बिक्री जारी रखने के लिए ‘ई-फॉम्रेसी’ के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल किया है। उन्होंने डिफाल्ट ई-फॉम्रेसी के खिलाफ कथित रूप से कोई कदम नहीं उठाने के लिए केंद्र के खिलाफ भी अवमानना कार्रवाई करने की मांग की है। कोर्ट ने 12 दिसंबर, 2018 को बिना लाइसेंस के ऑनलाइन फॉम्रेसी द्वारा दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी थी।

 

हालांकि कुछ ई-फॉम्रेसी ने इससे पहले कोर्ट से कहा था कि उन्हें दवाओं और चिकित्सकों के बताए गए दवाओं की ऑनलाइन बिक्री करने के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे इसे उन्हें बेचती नहीं है। इसके बजाय वह ‘फूड डिलीवरी एप स्विगी’ की तरह केवल दवाओं की आपूर्ति करती है।

केंद्र के अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि ई-फाम्रेसी को विनियमित करने के लिए नियम बनाने के प्रस्ताव पर मंथन चल रहा है, कुछ समय और दिया जाए। पीठ ने फिर उन्हें समय प्रदान कर दिया।
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