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दिल्ली सरकार उत्तरी निगम के छह अस्पताल अपने अधीन लेने को तैयार

Tue, 08 Jun 2021 10:31 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jun 2021 10:31 PM IST
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Delhi government willing to takeover six corporation hospitals
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने उच्च न्यायालय में दावा किया है कि उत्तरी नगर निगम (उत्तरी एमसीडी) ने वित्तीय व्यय को लेकर अपने छह अस्पताल केंद्र को सौंपने का प्रस्ताव पास किया है। सरकार ने कहा स्वास्थ्य राज्य सरकार का मुद्दा है ऐसे में वह सभी अस्पतालों को अपने अधीन लेकर चलाने के लिए तैयार है। अदालत ने एमसीडी व केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीन सिंह की पीठ के समक्ष दिल्ली सरकार के तर्क पर उत्तरी निगम के वकील दिव्य प्रकाश पांडे ने कहा कि वह इस प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति रिपोर्ट पेश करेंगे। इसके अलावा वे रिपोर्ट में स्पष्ट करेंगे कि इन छह अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेज को चलाने पर फिलहाल नगर निकाय को कितना खर्च वहन करना पड़ता है।
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अदालत ने चार जून को अपने आदेश में कहा कि यदि केंद्र सरकार को छह अस्पतालों एवं एक मेडिकल कॉलेज को अपने हाथों में लेने का ऐसा कोई प्रस्ताव मिला है तो वह इस प्रस्ताव की स्थिति पर रिपोर्ट पेश करे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई आठ जुलाई तय की है।
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दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि यदि केंद्र इन अस्पतालों को लेने के लिए तैयार नहीं है तो दिल्ली सरकार इस बात को ध्यान में रखते हुए इन संस्थानों को चलाना चाहेगी कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने हालांकि कहा कि यह नगर निकाय के आयुक्त द्वारा निगम सचिव के साथ किया गया आंतरिक संवाद था और यह स्पष्ट नहीं है कि निगम ने इस संबंध में कोई प्रस्ताव पारित किया है या नहीं। इस संबंध में स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी।
अदालत को दिल्ली सरकार ने उत्तरी निगम के आयुक्त द्वारा निगम सचिव को भेजे गए उस पत्र का हवाला देते हुए बताया कि हिंदू राव अस्पताल, कस्तूरबा अस्पताल, आरबीआईपीएम अस्पताल, गिरधारी लाल अस्पताल, एमवीआईडी अस्पताल और बालक राम अस्पताल को चलाने में 2014-17 के दौरान खर्च का विवरण है।
दिल्ली सरकार के अनुसार कि पत्र में कहा गया है कि इन अस्पतालों को चलाने में उत्तरी निगम पर आने वाले सलाना 500 से 600 करोड़ रुपये का खर्च घटाने के लिए उन्हें केंद्र को सौंप दिया जाए।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि इस पत्र को अदालत के समक्ष लाने का कारण यह है कि यह पीठ कोविड -19 प्रबंधन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि ये अदालत विशेष रूप से महामारी की दूसरी लहर में जिन पहलुओं से निपटी है, उनमें से एक राजधानी में चिकित्सा बुनियादी ढांचे में कमियां हैं।
उन्होंने कहा कि चूंकि उत्तर निगम इस समय वित्तीय तंगी में है, इसलिए इन अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को दिन-प्रतिदिन के प्रबंधन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पत्र में निहित प्रस्ताव पर केंद्र द्वारा विचार किया जाना चाहिए। यदि वह इन अस्पतालों को लेने को तैयार नहीं है तो दिल्ली सरकार इस तथ्य पर विचार करते हुए संस्थानों को अपने हाथ में लेने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि उत्तर निगम ने स्वयं माना है कि इससे पहले भी फायर ब्रिगेड, दिल्ली विद्युत बोर्ड और दिल्ली जल बोर्ड जैसे संस्थानों को दिल्ली सरकार ने नगर निगमों से अपने कब्जे में ले लिया है।
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