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कोरोना महामारी: किराएदारों के किराए का भुगतान करने में दिल्ली सरकार असमर्थ, कहा- फैसले पर अमल संभव नहीं
Tue, 28 Sep 2021 12:32 AM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Tue, 28 Sep 2021 12:32 AM IST
सार
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष वशिष्ठ से अदालत ने मौखिक रूप से पूछा कि क्या सरकार अपने वायदे के अनुसार किराएदारों को राशि का एक हिस्सा भी देने को तैयार है। दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि केजरीवाल का बयान कोई वादा नहीं है।
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : ANI
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विस्तार
दिल्ली सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान किराएदारों के किराए का भुगतान करने में असमर्थता जताई है। इस मामले में सरकार ने याचिका दायर कर हाईकोर्ट के सिंगल जज के उस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है, जिसमें उसे किराएदारों के किराए का भुगतान करने के लिए नीति बनाने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने फेसले पर रोक लगा दी। साथ ही सरकार से पूछा कि क्या वह राशि के कुछ हिस्से का भुगतान को तैयार है या नहीं।
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यह मामला कोरोना महामारी के दौरान किराएदारों से संबंधित था। मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि गरीब किराएदारों का किराया सरकार अदा करेगी। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के ही सिंगल जज के फैसले पर रोक लगाई है। यह आदेश सिंगल जज न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह के 22 जुलाई को दिया था। दिल्ली सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी है। पीठ ने मामले में याचिकाकर्ता को नोटिस जारी का सुनवाई 29 नवंबर तय की है।
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केजरीवाल का बयान कोई वादा नहीं
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष वशिष्ठ से अदालत ने मौखिक रूप से पूछा कि क्या सरकार अपने वायदे के अनुसार किराएदारों को राशि का एक हिस्सा भी देने को तैयार है। दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि केजरीवाल का बयान कोई वादा नहीं है। अदालत ने पूछा आपका पेमेंट करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन आपने बयान दिया था। क्या हमें इसे रिकॉर्ड करना चाहिए? क्या आप 5 प्रतिशत भी भुगतान करने को तैयार हैं? दिल्ली सरकार ने कहा कि निर्णय पर अमल संभव नहीं है।
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किराएदार किराया देने में असमर्थ है
वहीं याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने गौरव जैन ने कहा कि सरकार ने संवादददाता सम्मेलन में कहा था कि जो किराएदार किराया देने में असमर्थ है उनका किराया सरकार अदा करेगी। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता बहुत गरीब हैं और एकल न्यायाधीश ने केवल दिल्ली सरकार से एक नीति बनाने के लिए कहा था। उन्होंने अदालत को बताया कि इसके लिए छह सप्ताह का समय दिया गया था, जिसे बढ़ाकर आठ सप्ताह कर दिया गया। यह बहुत आश्चर्य की बात है कि किराए की इतनी कम राशि के लिए, दिल्ली सरकार, जो राज्यों के बीच सबसे अधिक बजट में से एक होने का दावा करती है, वे इसका भुगतान करने से इनकार कर रहे हैं।
आम लोग मुख्यमंत्री पर विश्वास करते हैं
अदालत के आदेश का पालन न कर आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं और उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई होनी चाहिए ऐेसे में फैसले पर रोक न लगाई जाए। पीठ ने उनके तर्क पर असहमति जताते हुए फैसले पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा फैसला मुख्यमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस की ट्रांसक्रिप्ट और अन्य तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार कर निकाला गया। यदि रोक नहीं लगाई गई तो सरकार को अपूरणीय क्षति होगी। सिंगल जज ने फैसले में कहा था कि यह वायदा किसी आम व्यक्ति ने नहीं बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री प्रेस कांफ्रेंस में किया था और आम लोग मुख्यमंत्री पर विश्वास करते हैं। ऐसे में सरकार को अपने मुख्यमंत्री के वायदे का समान करते हुए एक नीति तय कर उसे पालन करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।