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अच्छी खबर: दिल्ली सरकार ने श्रमिकों के खातों में डाले पांच-पांच हजार रुपये, निर्माण कार्य में लगे 2.95 लाख मजदूरों को फायदा
Sat, 27 Nov 2021 10:51 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 27 Nov 2021 10:51 PM IST
सार
वायु प्रदूषण के कारण निर्माण गतिविधियों के बंद होने से निर्माण श्रमिकों की आजीविका रुक गई है। इसे ही देखते हुए सरकार ने सभी को सहायता राशि देने की घोषणा की है। दिल्ली के सभी सात लाख निर्माण मजदूरों को इस राशि से पांच-पांच हजार रुपया बतौर सहायता राशि दी जाएगी।
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
निर्माण श्रमिकों के लिए राहत की खबर है। अब उनके घरों का चुल्हा नहीं बुझेगा। दिल्ली सरकार ने निर्माण श्रमिकों की आजीविका को ध्यान में रख 350 करोड़ रुपया जारी किया है। दिल्ली के सभी सात लाख निर्माण मजदूरों को इस राशि से पांच-पांच हजार रुपया बतौर सहायता राशि दी जाएगी।
दरअसल वायु प्रदूषण के कारण निर्माण गतिविधियों के बंद होने से निर्माण श्रमिकों की आजीविका रुक गई है। इसे ही देखते हुए सरकार ने सभी को सहायता राशि देने की घोषणा की है। दिल्ली सरकार ने शनिवार को सात लाख पंजीकृत निर्माण श्रमिकों में 2.95 लाख निर्माण श्रमिकों के खातों में सहायता राशि भेज दी है। सरकार का कहना है कि बाकि श्रमिकों के खातों में भी 2 दिन में यह राशि भेज दी जाएगी।
दिल्ली सरकार ने कहा है कि समय-समय पर इस प्रकार श्रमिकों की मदद करने वाली देश की पहली सरकार है। कोरोना के दौरान भी दिल्ली सरकार ने 2 बार निर्माण श्रमिकों के खातों में 5000-5000 हजार रुपयों की सहायता राशि भेजी थी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि दिल्ली सरकार निर्माण श्रमिकों के साथ हर कदम पर खड़ी है।
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श्रमिक देश के रीढ़ की हड्डी है, जो देश को मजबूत करते है। मजदूर खड़े है तो हमारी इमारतें खड़ी है, शहर खड़े है। इसलिए श्रमिकों के सम्मान व हितों का ध्यान रखना हमारी सरकार की मुख्य प्राथमिकता है।
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दरअसल वायु प्रदूषण के कारण निर्माण गतिविधियों के बंद होने से निर्माण श्रमिकों की आजीविका रुक गई है। इसे ही देखते हुए सरकार ने सभी को सहायता राशि देने की घोषणा की है। दिल्ली सरकार ने शनिवार को सात लाख पंजीकृत निर्माण श्रमिकों में 2.95 लाख निर्माण श्रमिकों के खातों में सहायता राशि भेज दी है। सरकार का कहना है कि बाकि श्रमिकों के खातों में भी 2 दिन में यह राशि भेज दी जाएगी।
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दिल्ली सरकार ने कहा है कि समय-समय पर इस प्रकार श्रमिकों की मदद करने वाली देश की पहली सरकार है। कोरोना के दौरान भी दिल्ली सरकार ने 2 बार निर्माण श्रमिकों के खातों में 5000-5000 हजार रुपयों की सहायता राशि भेजी थी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि दिल्ली सरकार निर्माण श्रमिकों के साथ हर कदम पर खड़ी है।
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श्रमिक देश के रीढ़ की हड्डी है, जो देश को मजबूत करते है। मजदूर खड़े है तो हमारी इमारतें खड़ी है, शहर खड़े है। इसलिए श्रमिकों के सम्मान व हितों का ध्यान रखना हमारी सरकार की मुख्य प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में बेशक निर्माण गतिविधियों पर रोक लगी है लेकिन श्रमिक भाइयों-बहनों के घरों में चूल्हे जलते रहेंगे दिल्ली सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक दिल्ली में निर्माण गतिविधियां बंद हैं उस दौरान निर्माण बोर्ड के साथ पंजीकृत नहीं होने वाले निर्माण श्रमिकों को पंजीकृत करने के लिए सरकार पूरी दिल्ली में बड़े रजिस्ट्रेशन कैंप के माध्यम से रजिस्ट्रेशन ड्राइव चलाएगी।
इस कदम से दिल्ली सरकार को दिल्ली में सभी निर्माण श्रमिकों को सहायता देने में मदद मिलेगी। दिल्ली में अभी 10 लाख निर्माण श्रमिक है, जिनमें से 7 लाख रजिस्टर्ड है।
दिल्ली सरकार अपने रजिस्ट्रेशन ड्राइव की मदद से जल्द से जल्द बाकि बचे निर्माण श्रमिकों को भी बोर्ड से रजिस्टर्ड करेगी। ताकि सभी श्रमिकों को दिल्ली सरकार द्वारा श्रमिकों के कल्याण के लिए शुरू किए गए योजनाओं का लाभ मिल सके। निर्माण गतिविधियां भले ही बंद हो जाए, लेकिन श्रमिकों के घरों के चूल्हे जलते रहेंगे।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक दिल्ली में निर्माण गतिविधियां बंद हैं उस दौरान निर्माण बोर्ड के साथ पंजीकृत नहीं होने वाले निर्माण श्रमिकों को पंजीकृत करने के लिए सरकार पूरी दिल्ली में बड़े रजिस्ट्रेशन कैंप के माध्यम से रजिस्ट्रेशन ड्राइव चलाएगी।
इस कदम से दिल्ली सरकार को दिल्ली में सभी निर्माण श्रमिकों को सहायता देने में मदद मिलेगी। दिल्ली में अभी 10 लाख निर्माण श्रमिक है, जिनमें से 7 लाख रजिस्टर्ड है।
दिल्ली सरकार अपने रजिस्ट्रेशन ड्राइव की मदद से जल्द से जल्द बाकि बचे निर्माण श्रमिकों को भी बोर्ड से रजिस्टर्ड करेगी। ताकि सभी श्रमिकों को दिल्ली सरकार द्वारा श्रमिकों के कल्याण के लिए शुरू किए गए योजनाओं का लाभ मिल सके। निर्माण गतिविधियां भले ही बंद हो जाए, लेकिन श्रमिकों के घरों के चूल्हे जलते रहेंगे।