Delhi : रोजाना जितना कचरा पैदा हो रहा पहली बार उससे ज्यादा निस्तारण, लक्ष्य के लिहाज से काम में तेजी
एमसीडी ने कचरे की निष्पादन क्षमता बढ़ाने में अप्रत्याशित रूप से सफलता हासिल की है। मौजूदा समय दिल्ली में हर दिन करीब 11,400 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है और तीनों लैंडफिल साइट पर 12,000-15,000 मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण हो रहा।
विस्तार
दिल्ली में जितना कचरा रोज पैदा होता है, पहली बार इससे ज्यादा निष्तारण हो रहा है। एमसीडी ने कचरे की निष्पादन क्षमता बढ़ाने में अप्रत्याशित रूप से सफलता हासिल की है। मौजूदा समय दिल्ली में हर दिन करीब 11,400 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है और तीनों लैंडफिल साइट पर 12,000-15,000 मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण हो रहा। लैंडफिल साइट पर कूड़े के पहाड़ को समाप्त करने के लिए निगम ने 2024 तक का लक्ष्य रखा है। गाजीपुर, भलस्वा और ओखला में तीन कूड़े के पहाड़ों पर कचरे को 10-15 मीटर तक कम किया गया है।
एलजी-सीएम दोनों कूड़े के पहाड़ों के प्रति संजीदा
जाने से कूड़े की कटाई-छंटाई के काम में तेजी आई है। दूसरे एलजी वीके सक्सेना और सीएम अरविंद केजरीवाल दोनों कूड़े के पहाड़ों के खात्मे को लेकर मौजूदा समय जिस तरह संजीदा हैं, ऐसी संजीदगी पहले कभी नहीं देखी गई। बेशक इसका लाभ दिल्ली और दिल्ली वासियों को मिलेगा।
वेस्ट टू एनर्जी प्लांट पूरी क्षमता से चलें तो तेजी से होगा काम
कचरे के निस्पादन के लिए निगम ने चार वेस्ट टू एनर्जी संयंत्र लगाए हैं, जिनमें से पहला ओखला में 1950 टन प्रतिदिन कचरा निस्तारण क्षमता का 25 मेगावाट का वेस्ट टू एनर्जी प्लांट चालू है। बवाना में 2500 टन प्रतिदिन कचरा निस्पादन क्षमता का दूसरा संयंत्र है, जहां हर दिन 24 मेगावाट बिजली बनती हैै। गाजीपुर में 1300 टन प्रतिदिन कचरा निष्तारण क्षमता का तीसरा संयंत्र है, लेकिन अभी यह पूरी क्षमता से नहीं चल रहा इसलिए हर दिन 750 टन कचरे से 12 मेगावाट बिजली बनाई जा रही। तेहखंड में 2400 टन प्रतिदिन कचरा निष्तारण क्षमता का चौथा संयंत्र लगा है, जहां पर ह रदिन करीब 2000 टन कचरे से 25 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है।
- शहर के बदनुमा दाग बने कूड़े के तीन पहाड़ : गाजीपुर लैंडफिल साइट साल 2017 में एशिया का सबसे बड़ा लैंडफिल साइट बन गया था। इसकी ऊंचाई 63 मीटर तक पहुंच गई थी। इसे 1984 में शुरू किया गया, 2002 में इसको बंद होना था। भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइटों को 1994 और 1996 में शुरू किया गया था। इन दोनों कूड़े के पहाड़ों की ऊंचाई 65 और 55 मीटर तक पहुंच गई थी। निगम अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में ह रदिन कुल 11,400 मीट्रिक टन कूड़ा पैदा होता है, करीब 6,200 मीट्रिक टन गाजीपुर और बाकी 5,200 टन ओखला व भलस्वा लैंडफिल जाता है।
रोहिणी-24 में सड़क पर नहीं फैलेगा कूड़ा
रोहिणी सेक्टर-24 बेगमपुर वार्ड में नया पोर्टेबल कॉम्पेक्टर लगाया गया है। इससे यहां सड़क पर कचरा बिखरा नजर नहीं आएगा। क्षेत्र में सफाई व्यवस्था सुदृढ़ होगी। कूड़े का समुचित निस्तारण हो सकेगा। उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के सांसद हंसराज हंस ने रविवार का इसका उद्घाटन किया। इस दौरान स्थानीय निगम पार्षद जयभगवान यादव, आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी व स्थानीय लोग उपस्थित रहे। कॉम्पेक्टर में कचरे को बंदकर रखा जाएगा। यह बिजली से ही खुलेगा और बंद होगा।