Delhi: बाढ़ पीड़ितों को मुआवजे में देरी पर वित्त मंत्री आतिशी का मुख्य सचिव को पत्र, लगाया लापरवाही का आरोप
दिल्ली की वित्त मंत्री आतिशी ने बाढ़ पीड़ितों को मुआवजे में देरी पर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। मंत्री आतिशी ने कहा कि आपदा और आपातकाल के समय नौकरशाह लापरवाही बरत रहे हैं।
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दिल्ली सरकार और नौकरशाही में चल रही खींचतान अब बाढ़ पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर सामने आई है। वित्त मंत्री आतिशी ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर ये सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि बाढ़ पीड़ितों की मुआवजा राशि में लापरवाही नहीं बरती जाए। शनिवार और रविवार को सभी अधिकारियों को इस काम के लिए तैनात किया जाए, ताकि सोमवार को बाढ़ ग्रस्त लोगों के बैक में पैसा स्थानांतरित हो सके।
आतिशी ने हैरानी जताई कि राहत राशि देने को लेकर बुलाई गई राजस्व विभाग की बैठक में महज 197 लोगों को ही स्वीकृत मुआवजा राशि मिली हैं। दिल्ली कैबिनेट ने बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार को 10,000 रुपये बतौर राहत देने का निर्णय लिया है। 10 दिन बीतने के बाद भी अधिकारियों का रवैया ढीला है। पत्र में कहा गया है कि इन अधिकारियों का सामान्य कार्य दिवस कैसा होगा जब वे आपातकाल और आपदा के समय में लापरवाही बरत रहे हैं। आतिशी ने मुख्य सचिव को सोमवार शाम 6 बजे तक स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देते हुए कहा है कि बांटे गए पैसे पर उन्हें और मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपी जाए।
आतिशी को मौखिक जानकारी दी गई
शनिवार शाम दिल्ली सरकार के सूत्रों ने बताया कि मंत्री आतिशी को अधिकारियों ने मौखिक रूप से स्थिति से अवगत कराया। 4000 से अधिक परिवारों में से 2500 से अधिक परिवारों का सत्यापन हो चुका है। 1500 परिवारों का सत्यापन होना बाकी है। पूर्वी दिल्ली बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हैं। लिहाजा, थोड़ा अधिक समय लग रहा। मंगलवार तक राहत राशि देने का काम पूरा हो जाएगा।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि ये शर्मनाक है कि आतिशी ने बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा वितरण में देरी का दोष अधिकारियों पर मढ़ने की कोशिश की है, जबकि इसके लिए मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं। वे जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं। 10,000 रुपये का मामूली मुआवजा अपने आप में बेमानी है। जिनका पूरा घर बाढ़ में तबाह होगा गया उन्हें इस रकम से कितनी राहत मिलेगी यह सभी को पता है।