इस बार गायब है केजरीवाल का 5000 डॉलर प्रति प्लेट वाला डिनर, चुनाव प्रचार में क्यों नहीं दिख रहे NRI
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2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव को देखें तो इस बार बहुत कुछ नजर नहीं आ रहा। पिछले चुनाव में एनआरआई समुदाय ने दिल खोलकर अरविंद केजरीवाल की मदद की थी। एनआरआई ने उनके लिए न केवल चंदा जुटाया, बल्कि देश विदेश में रह कर चुनाव प्रचार भी किया।
अमेरिका, ब्रिटेन, दुबई और हांगकांग जैसे कई राष्ट्रों से रोजाना हजारों लोग दिल्ली के वोटरों को फोन कर केजरीवाल की पार्टी को वोट देने की अपील करते रहे। चंदा जुटाने के लिए न्यूयार्क सहित कई शहरों में केजरीवाल का डिनर रखा गया था। न्यूयार्क में एक प्लेट की कीमत पांच हजार डॉलर रखी गई।
एक करोड़ 80 लाख रुपये से अधिक का चंदा एकत्रित हो गया। लेकिन इस बार न तो ऐसे डिनर दिख रहे हैं और न ही एनआरआई समुदाय की चुनावी तत्परता।
न्यूयार्क के डिनर में करीब साठ लोगों को आमंत्रित किया गया था। दुबई में वर्ल्ड ब्रांड समिट, आबू धाबी चेप्टर ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के आयोजित कार्यक्रम और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर विभाग में भी केजरीवाल पहुचे थे।
हालाकि उस वक्त आप नेताओं ने इस बात से इंकार किया था कि अरविंद केजरीवाल विदेश में चंदा एकत्रित करने के लिए गए हैं। उनका कहना था कि वहां पर अरविंद केजरीवाल के दोस्त निजी स्तर पर डिनर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। उसमें प्रत्यक्ष तौर पर पार्टी का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने तीस करोड़ रुपये फंड जुटाने का लक्ष्य रखा था। इसके तहत करीब चार लाख एनआरआई को ई-मेल भेजी गईं। आम आदमी पार्टी के एनआरआई समर्थकों ने विधानसभा चुनाव में जंगपुरा, द्वारका, आरके पुरम और कालकाजी सीटों पर अपनी दावेदारी जताई थी।
एनआरआई समुदाय ने की थी आप की मदद
अमेरिका, आस्ट्रेलिया, हांगकांग, ब्रिटेन, सिंगापुर और कनाडा आदि देशों के आईटी एक्सपर्ट ने आप के चुनाव प्रचार में फेसबुक प्रबंधन, फोन कॉल, ई-मेल और लघु फिल्में तैयार करने की जिम्मेदारी संभाली थी। करीब आठ सौ से ज्यादा एनआरआई चुनाव प्रचार में सक्रिय तौर पर जुट हुए थे। एनआरआई को आप के साथ जोड़ने की जिम्मेदारी शिकागो (अमेरिका) के डॉ. मुनीष रायजादा को सौंपी गई।
उन्होंने अमेरिका व ब्रिटेन सहित कई देशों में सिटीजल कॉल कैंपेन (सीसीसी) कार्यक्रम शुरू किया था। बाद में इस कैंपेन के साथ दस हजार सदस्य जुड़ गए। इन सदस्यों ने रोजाना हजारों वोटरों से फोन पर बातचीत कर आप को समर्थन देने की अपील की। इसके अलावा गत विधानसभा चुनाव में एनआरआई समुदाय ने करीब डेढ़ दर्जन विधानसभाओं को गोद लिया था।
बाबरपुर विस को कुवैत, बुराड़ी और रोहिणी को जर्मनी, दिल्ली कैंट को शिकागो, करावल नगर को सिएटल (अमेरिका), मटिया महल को बे-एरिया (यूएसए), महरौली को मिशीगन, नरेला को न्यू जर्सी, नई दिल्ली को लीड्स (यूके), पटपड़गंज को बे-एरिया यूएसए, संगम विहार को डलास (अमेरिका) और शालीमार बाग को सिंगापुर के आप समर्थकों ने गोद लिया था।
कनॉट प्लेस ऑफिस में आते थे एनआरआई
2015 में कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर रोड पर आप कार्यालय में परंपरागत चुनावी भीड़ की बजाए कम्प्यूटर और मोबाइल फोन पर टकटक करते हुए एनआरआई कार्यकर्ता देखे जा सकते थे। शिकागो (अमेरिका) से दिल्ली पहुंचे मुनीष रायजादा को सभी एनआरआई के साथ समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने विदेश में आप के समर्थकों के लिए एक संयुक्त प्लेटफार्म तैयार कर दिया था।
अकेले अमेरिका और ब्रिटेन में ही सिटीजल कॉल कैंपेन (सीसीसी) के जरिए आठ हजार सदस्यों को आम आदमी पार्टी से जोड़ा गया। ये सदस्य रोजाना दिल्ली के करीब दस हजार वोटरों से फोन पर बातचीत कर आप को समर्थन देने की अपील करते थे।
इनके पास 70 विधानसभा क्षेत्रों की हर छोटी-बड़ी जानकारी रहती थी। किस विस क्षेत्र में प्रचार का कौन सा तरीका अपनाना है, प्रचार के साधन और वोटरों से सीधा संपर्क आदि रणनीति ये सदस्य विदेश में ही तैयार करते रहे। वहीं गुरुवार को बोस्टन से आईटी एक्सपर्ट मधुसूधन, ब्रिटेन के संदीप और कुवैत से रमेश आप का प्रचार करने के लिए दिल्ली पहुंचे।
इस बार कहां हैं एनआरआई
डॉ. मुनीष रायजादा कहते हैं कि उस वक्त यह पार्टी आंदोलन से निकली थी। केवल मैं ही नहीं, बल्कि सैकड़ों एनआरआई अपनी नौकरी छोड़कर केजरीवाल का समर्थन करने दिल्ली पहुंच गए थे। पिछले चुनाव के बाद आप ने अपनी वेबसाइट पर चंदे की डिटेल देना बंद कर दिया। पार्टी में जिस किसी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई, वो पार्टी से बाहर कर दिया गया।
जिन लोगों ने पार्टी को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई, वे भी पार्टी से निकाल दिए गए। जैसे प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, प्रो. आनंद कुमार, डॉ. मुनीष, अजीत झा और दूसरे दर्जनों नेता केजरीवाल के निशाने पर आ गए। रायजादा के अनुसार, मैंने करीब दो-तीन साल दिल्ली आकर केजरीवाल के कथित चंदा घोटाले के खिलाफ आवाज बुलंद की। हमें कोई लालच नहीं था।
चूंकि सभी लोग देश की भ्रष्ट व्यवस्था को बदलने के लिए एक साथ आए थे, लेकिन केजरीवाल बाद में इस बात से पीछे हट गए। पार्टी को कितना और कहां से चंदा मिला, यह जानकारी वेबसाइट पर डाली जाए, लेकिन केजरीवाल ने इसे नहीं माना। नतीजा, इस बार एनआरआई समुदाय पूरी तरह चुनाव प्रचार से दूर है।