दिल्ली: पत्नी की आत्महत्या से हुई मौत को सड़क दुर्घटना बता मांग रहा था 50 लाख मुआवजा, कोर्ट ने याचिका की खारिज
मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) की न्यायाधीश कामिनी लाऊ ने मृतका के पति को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि उसने अपनी पत्नी की आत्महत्या से हुई मौत को मोटर दुर्घटना बताकर मुआवजे का दावा कर उसके शव पर पैसा वसूलने की कोशिश की है।
विस्तार
अदालत ने पत्नी की कथित आत्महत्या से हुई मौत को सड़क दुर्घटना से हुई मौत बताकर 50 लाख रुपये का मुआवजा मांगने का मामला दायर करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने उत्तर प्रदेश निवासी राजीव यादव की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उसके खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला चल रहा है और याची ने उससे बचने के लिए दिल्ली अदालत में मुआवजे के लिए याचिका दायर की है।
राजीव यादव ने तर्क रखा कि तेज गति से आ रहे एक ट्रक ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में अक्टूबर 2018 को उसकी पत्नी पूजा यादव को टक्कर मार दी थी और यह घटना उस समय हुई थी जब वह मंदिर जा रही थी।
मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) की न्यायाधीश कामिनी लाऊ ने उसे राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि यादव ने अपनी पत्नी की आत्महत्या से हुई मौत को मोटर दुर्घटना बताकर मुआवजे का दावा कर उसके शव पर पैसा वसूलने की कोशिश की है। उन्होंने कहा पूजा ने अपनी मौत से पांच महीने पहले राजीव से शादी की थी और वह अपने माता-पिता से उसके द्वारा प्रताड़ित किए जाने के बारे में आए दिन शिकायत करती थी।
उन्होंने कहा कि अपनी पत्नी की मौत के मामले में यादव की भूमिका की उत्तर प्रदेश की एक आपराधिक अदालत में जांच चल रही है और दहेज तथा आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बचाव की कोशिश के तौर पर दिल्ली की अदालत में याचिका दायर की गई।
उन्होंने कहा यह पहला मामला नहीं है जहां आत्महत्या/हत्या की मौत की घटना को सड़क यातायात दुर्घटना के रूप में पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है खासकर जब मृतक की मृत्यु के संबंध में अनिश्चितता हो।