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दिल्ली कैबिनेट की बैठक: 300 लो फ्लोर इलेक्ट्रिक एसी बसों को मिली मंजूरी, अक्टूबर में आएगी पहली खेप
Fri, 26 Mar 2021 10:43 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Fri, 26 Mar 2021 10:43 PM IST
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दिल्ली कैबिनेट की बैठक
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में शुक्रवार को दिल्ली कैबिनेट की बैठक हुई। इस दौरान दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को बेहतर करने और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अहम फैसला लिया गया।
केंद्र सरकार की ‘फास्ट एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया (फेम) फेज-2’योजना के तहत दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में 300 लो फ्लोर एसी इलेक्ट्रिक एसी बसों को बेड़े में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दिल्लीवासियों को अत्याधुनिक सुविधाएं से युक्त गैर-प्रदूषणकारी इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पहली बार दिल्ली में डीटीसी के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया जा रहा है। किसी भी राज्य सरकार या राज्य परिवहन उपक्रम के तहत पहली बार इतनी बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जा रही हैं। जल्द ही दिल्ली की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें दौड़ेंगी।
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तीसरी बार हुआ ई बसों के लिए टेंडर
डीटीसी की ओर से अक्टूबर 2019 में पहले टेंडर जारी किया गया, लेकिन इसे रद्द कर दिया गया था। जून 2020 में दूसरे टेंडर को भी प्रतिस्पर्धी दरें न मिलने की वजह से रद्द कर दिया गया। तीसरी बार दिसंबर 2020 में टेंडर जारी किया गया, जिसे अमली जामा पहनाया जाएगा।
जेबीएम-टाटा करेंगी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन
डीटीसी के बेड़े में शामिल होने वाली बसों का संचालन ओपेक्स मॉडल पर किया जाएगा। यह डीटीसी की ओर से एक प्रमुख नीतिगत बदलाव है। अभी तक डीटीसी केवल अपनी बसों का ही संचालन करता रहा है। बिजली से चलने वाली 300 इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन के मेसर्स जेबीएम ने सबसे कम 68.58 रुपये प्रति किमी की बोली लगाई है। दूसरी कंपनी मेसर्स टाटा मोटर्स है। टेंडर की शर्तों के अनुसार मेसर्स जेबीएम 200 बसों जबकि टाटा 100 बसों का संचालन करेगी। एक बार पूर्ण तौर पर चार्ज होने पर बसें कम से कम 140 किमी की दूरी तय कर सकेंगी। ऑपरेटर चालक प्रदान करेगा जबकि और बसों में डीटीसी के कंडक्टर रहेंगे।
रोजाना 200 किलोमीटर तक दौड़ेंगी ई बसें
ऑपरेटर 10 साल तक बसों या बैटरी के रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा। ऑपरेटर समय पर बैटरी बदलने के लिए बाध्य होगा। इन बसों के संचालन के लिए बिजली की खपत का खर्च डीटीसी की ओर से किया जाएगा। 14 किलोवाट प्रति किमी से अधिक की दक्षता के लिए बिजली की खपत होने पर वार्षिक खपत के आधार पर ऑपरेटर से राशि वसूली जाएगी। चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत, चार्जिंग उपकरण और ट्रांसफार्मर की लागत ऑपरेटर द्वारा वहन किया जाएगा। ऑपरेटर तेज या स्लो चार्जर का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र होगा लेकिन रोजाना कम से कम 200 किमी तक बसों का संचालन करना होगा।
चरणों में अगले साल जनवरी तक बेड़े में शामिल होंगी बसें
जून 2021 में बसों का प्रोटोटाइप डीटीसी को मिलने की संभावना है। 118 बसों की पहली खेप अक्टूबर 2021 में आएगी जबकि नवंबर में 100 अतिरिक्त बसें जोड़ी जाएंगी। 20 बसें जनवरी 2021 तक प्राप्त होने की संभावना है। ये बसें सुभाष प्लेस डिपो, मायापुरी डिपो, रोहिणी-2 डिपो, राजघाट -2 डिपो और मुंडेला कलां डिपो में पार्क की जाएंगी, जिसके लिए तमाम सुविधाएं होंगी।
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केंद्र सरकार की ‘फास्ट एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया (फेम) फेज-2’योजना के तहत दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में 300 लो फ्लोर एसी इलेक्ट्रिक एसी बसों को बेड़े में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दिल्लीवासियों को अत्याधुनिक सुविधाएं से युक्त गैर-प्रदूषणकारी इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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पहली बार दिल्ली में डीटीसी के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया जा रहा है। किसी भी राज्य सरकार या राज्य परिवहन उपक्रम के तहत पहली बार इतनी बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जा रही हैं। जल्द ही दिल्ली की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें दौड़ेंगी।
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तीसरी बार हुआ ई बसों के लिए टेंडर
डीटीसी की ओर से अक्टूबर 2019 में पहले टेंडर जारी किया गया, लेकिन इसे रद्द कर दिया गया था। जून 2020 में दूसरे टेंडर को भी प्रतिस्पर्धी दरें न मिलने की वजह से रद्द कर दिया गया। तीसरी बार दिसंबर 2020 में टेंडर जारी किया गया, जिसे अमली जामा पहनाया जाएगा।
जेबीएम-टाटा करेंगी इलेक्ट्रिक बसों का संचालन
डीटीसी के बेड़े में शामिल होने वाली बसों का संचालन ओपेक्स मॉडल पर किया जाएगा। यह डीटीसी की ओर से एक प्रमुख नीतिगत बदलाव है। अभी तक डीटीसी केवल अपनी बसों का ही संचालन करता रहा है। बिजली से चलने वाली 300 इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन के मेसर्स जेबीएम ने सबसे कम 68.58 रुपये प्रति किमी की बोली लगाई है। दूसरी कंपनी मेसर्स टाटा मोटर्स है। टेंडर की शर्तों के अनुसार मेसर्स जेबीएम 200 बसों जबकि टाटा 100 बसों का संचालन करेगी। एक बार पूर्ण तौर पर चार्ज होने पर बसें कम से कम 140 किमी की दूरी तय कर सकेंगी। ऑपरेटर चालक प्रदान करेगा जबकि और बसों में डीटीसी के कंडक्टर रहेंगे।
रोजाना 200 किलोमीटर तक दौड़ेंगी ई बसें
ऑपरेटर 10 साल तक बसों या बैटरी के रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा। ऑपरेटर समय पर बैटरी बदलने के लिए बाध्य होगा। इन बसों के संचालन के लिए बिजली की खपत का खर्च डीटीसी की ओर से किया जाएगा। 14 किलोवाट प्रति किमी से अधिक की दक्षता के लिए बिजली की खपत होने पर वार्षिक खपत के आधार पर ऑपरेटर से राशि वसूली जाएगी। चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत, चार्जिंग उपकरण और ट्रांसफार्मर की लागत ऑपरेटर द्वारा वहन किया जाएगा। ऑपरेटर तेज या स्लो चार्जर का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र होगा लेकिन रोजाना कम से कम 200 किमी तक बसों का संचालन करना होगा।
चरणों में अगले साल जनवरी तक बेड़े में शामिल होंगी बसें
जून 2021 में बसों का प्रोटोटाइप डीटीसी को मिलने की संभावना है। 118 बसों की पहली खेप अक्टूबर 2021 में आएगी जबकि नवंबर में 100 अतिरिक्त बसें जोड़ी जाएंगी। 20 बसें जनवरी 2021 तक प्राप्त होने की संभावना है। ये बसें सुभाष प्लेस डिपो, मायापुरी डिपो, रोहिणी-2 डिपो, राजघाट -2 डिपो और मुंडेला कलां डिपो में पार्क की जाएंगी, जिसके लिए तमाम सुविधाएं होंगी।