दिल्ली: सिसोदिया को घेरने के लिए भाजपा नेताओं ने सरकारी स्कूलों में दस्तक दी, स्कूलों की स्थिति खराब होने का लगाया आरोप
दिल्ली की आप सरकार गत पांच साल से स्कूलों की स्थिति सुधारने का प्रचार कर रही है और इन पांच सालों में यह पहला अवसर है जब भाजपा के नेता स्कूलों की स्थिति के मामले में दिल्ली सरकार को घेरने के लिए मैदान में उतरे हैं।
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भाजपा को घेरने की कड़ी में सोमवार को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की गुजरात के स्कूलों में दस्तक पर प्रदेश भाजपा के नेता उन्हें कटघरे में खड़ा करने के लिए दिल्ली सरकार के स्कूलों पहुंचे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली सरकार के स्कूलों की स्थिति हर मामले में खराब होने का आरोप लगाया।
दिल्ली की आप सरकार गत पांच साल से स्कूलों की स्थिति सुधारने का प्रचार कर रही है और इन पांच सालों में यह पहला अवसर है जब भाजपा के नेता स्कूलों की स्थिति के मामले में दिल्ली सरकार को घेरने के लिए मैदान में उतरे हैं।
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी, सांसद रमेश बिधूड़ी, परवेश वर्मा के अलावा प्रदेश भाजपा के महामंत्री कुलजीत चहल दिल्ली सरकार के स्कूलों में स्थिति का जायजा लेने गए। मुस्ताफाबाद के स्कूल में गए रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि पिछले सात सालों में दिल्ली सरकार यहां इमारत तक नहीं बना पाई है। चार शिफ्टों में चलने वाले इस स्कूल में लगभग छह हजार छात्र-छत्राएं पढ़ते हैं। इस तरह दिल्ली सरकार की विज्ञापन रुपी शिक्षा मॉडल की सच्चाई आज पूरी दुनिया जान चुकी है।
सांसद रमेश बिधूड़ी ने भी किया दौरा
सांसद रमेश बिधूड़ी ने दिल्ली सरकार के रेलवे कॉलोनी, मोलड़बंद, देवली आदि स्कूलों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि दिल्ली के अधिकतर स्कूलों में शिक्षकों एवं सफाईकर्मियों की कमी है। बच्चों के लिए मूलभूत जरूरतों की भी कमी है। वहीं सांसद परवेश साहिब सिंह ने पंडवाला खुर्द स्थित दिल्ली सरकार के स्कूल का दौरा किया। उनके अनुसार इस स्कूल में होर्डिंग्स के अलावा सब कुछ जर्जर स्थिति में था।
परवेश साहिब सिंह ने लगाया आरोप
उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में जाकर दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री स्कूलों का भ्रमण कर रहे हैं, लेकिन वे दिल्ली के स्कूलों की स्थिति जानने की कोशिश तक नहीं कर रहे हैं। मुख्यमंत्री स्कूलों के नाम पर सिर्फ करोड़ों रुपये का विज्ञापन लगाकर दिल्ली वालों को गुमराह कर रहे हैं और वह विज्ञापन का कार्य तेज करने के लिए शिक्षा बजट को डेढ़ गुना बढ़ाने की बात कर रहे हैं। स्कूलों की जर्जर घोषित की जा चुकी इमारतों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।