Delhi: दिल्ली की हवा हुई 'बेहद खराब, लेकिन सात साल में दिवाली पर अब भी दूसरी बार सबसे अच्छी
दिल्ली ने पिछले साल दिवाली पर 382 का एक्यूआई दर्ज किया था, इससे पहले, 2020 में 414, 2019 में 337, 2017 में 319 और 2016 में 431 रहा था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार
पड़ोसी शहरों गाजियाबाद (301), नोएडा (303), ग्रेटर नोएडा (270), गुरुग्राम (325) और फरीदाबाद (256) ने खराब से बहुत खराब वायु गुणवत्ता पहुंच गई है।
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पराली जलाने, पटाखे फोड़ने और प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण दिल्ली की वायु गुणवत्ता सोमवार को ‘बहुत खराब’ हो गई। हालांकि
शहर का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 312 रहा। हालाकि यह अभी भी सात साल में दिवाली के दिन दूसरा सबसे कम रहा है।
इससे पहले, शहर ने 2018 में दिवाली पर 281 का एक्यूआई दर्ज किया था। दिल्ली में पिछले साल दिवाली पर 382 का एक्यूआई दर्ज किया था। वहीं, इससे पहले 2020 में 414, 2019 में 337, 2017 में 319 और 2016 में 431 दर्ज किया गया था। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार पड़ोसी शहरों गाजियाबाद (301), नोएडा (303), ग्रेटर नोएडा (270), गुरुग्राम (325) और फरीदाबाद (256) की हवा खराब से बहुत खराब स्थिति में पहुंच गई है।
शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 और 100 'संतोषजनक', 101 और 200 'मध्यम', 201 और 300 'खराब', 301 और 400 'बहुत खराब', 401 और 500 'गंभीर' माना जाता है।
अपेक्षाकृत बेहतर हवा का मतलब यह नहीं है कि यह अच्छी हवा है। राजधानी दिल्ली में 25 निगरानी स्टेशनों पर पीएम 2.5 का स्तर शाम 4 बजे 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के मानक से पांच से छह गुना ज्यादा था। पीएम 2.5 महीन कण होते हैं जो 2.5 माइक्रोन या उससे कम व्यास के होते हैं और श्वसन पथ में गहराई तक जा सकते हैं। फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं।
रविवार शाम को शहर में 24 घंटे का औसत एक्यूआई 259 दर्ज किया गया, जो दिवाली से एक दिन पहले सात साल में सबसे कम था। तापमान में गिरावट और हवा की गति के बीच रात में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया क्योंकि लोगों ने राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में पटाखे चलाए हैं। रविवार को बीते 24 घंटे में उत्तरी भारत में 850 जगहों पर पराली जलने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। वहीं सोमवार को बढ़कर 1318 घटनाएं रिकॉर्ड की गई, जो इस मौसम में अब तक का सबसे अधिक है।
हवा की मध्यम गति और ताजा परिस्थितियों के कारण दिन के दौरान हवा की गुणवत्ता की स्थिति काफी हद तक स्थिर रही। हालांकि, कम तापमान और बंद हवाएं व रात में पटाखों से निकलने वाले प्रदूषण के कारण मंगलवार की सुबह तक हवा की गुणवत्ता "बहुत खराब" श्रेणी या यहां तक कि "गंभीर" क्षेत्र में जा सकता है।
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक पूर्वानुमान एजेंसी सफर ने पहले भविष्यवाणी की थी कि बंद हवाओं और कम तापमान के कारण सोमवार सुबह (दिवाली) हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' हो सकती है, जो हवा में प्रदूषकों के तेजी से संचय की अनुमति देती है।
यदि पिछले साल की तरह पटाखे जलते हैं तो दिवाली की रात में ही हवा की गुणवत्ता 'गंभीर' स्तर तक गिर सकती है। एक और दिन के लिए 'रेड' ज़ोन में बनी रह सकती है।