दिल्ली: मुंबई में बैठे सरगना के इशारे पर होती थी चोरी, झपटमारी के फोन की खरीदारी, तीन गिरफ्तार
चोरी और झपटमारी वाले फोन अन्य राज्यों में चल रहे थे। खासकर दिल्ली से लूटे और झपटे गए फोन दक्षिण भारत में चल रहे हैं। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मुंबई और दिल्ली में बैठे कुछ लोग ऐसे फोन की खरीदारी कर रहे हैं। इस दौरान पुलिस को मुंबई के रहने वाले सिद्धार्थ के बारे में जानकारी मिली।
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पूर्वी दिल्ली स्पेशल स्टाफ ने बदमाशों से मोबाइल खरीदने वाले तीन खरीदारों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से 155 मोबाइल फोन, फोन के आईएमईआई को बदलने में इस्तेमाल दो लैपटॉप, एक कनेक्टर और अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी से झपटमारी के 22 और चोरी के 27 मामले सुलझाने का दावा किया है।
जिला पुलिस उपायुक्त प्रियंका कश्यप ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुंबई के अंधेरी निवासी सिद्धार्थ सिंह, चंदपुर बिजनौर यूपी निवासी लुकमान, मोहल्ला काजीपाड़ा, बिजनौर यूपी निवासी सलमान के रूप में हुई है। हाल के दिनों में झपटमारी और चोरी के मामले में बढ़ोत्तरी के बाद पुलिस उपायुक्त ने स्पेशल स्टाफ को बदमाशों को पकड़ने का निर्देश दिया था।
स्पेशल सेल ने लूटपाट और झपटमारी के मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने जमानत पर जेल से बाहर आए बदमाशों से पूछताछ की। साथ ही अपने मुखबिरों को सक्रिय किया। पुलिस तकनीकी जांच के जरिए उन खरीदारों की पहचान करने में जुट गई जो बदमाशों से लूटे गए मोबाइल फोन खरीदते थे।
अन्य राज्यों में चल रहे थे चोरी-झपटमारी के फोन
जांच में पता चला कि चोरी और झपटमारी वाले फोन अन्य राज्यों में चल रहे थे। खासकर दिल्ली से लूटे और झपटे गए फोन दक्षिण भारत में चल रहे हैं। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मुंबई और दिल्ली में बैठे कुछ लोग ऐसे फोन की खरीदारी कर रहे हैं। इस दौरान पुलिस को मुंबई के रहने वाले सिद्धार्थ के बारे में जानकारी मिली।
सात दिसंबर को पुलिस ने एक सूचना पर सिद्धार्थ को शकरपुर से गिरफ्तार कर लिया, जब वह दिल्ली से फोन का खेप लेकर मुंबई जा रहा था। उसके पास से 58 फोन मिले। पूछताछ में उसने बताया कि उसने यह फोन चांदबाग निवासी सलमान और लुकमान से लिए हैं। पुलिस ने उसके निशानदेही पर दोनों आरोपियों के ठिकाने पर दबिश दी और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। एक के पास से 72 जबकि दूसरे के पास से 25 मोबाइल फोन मिले।
मुंबई के सिद्धेश के इशारे पर हो रहा था काम
पूछताछ में सिद्धार्थ ने खुलासा किया कि वह मुंबई के एक सिद्धेश के इशारे पर काम कर रहा है। उसने बताया कि वह 30 हजार के मासिक वेतन पर काम करता है। वह सलमान और लुकमान से फोन खरीदने के बाद उसे व्यक्तिगत और कूरियर के जरिए मुंबई भेजता था। वहीं सलमान और लुकमान ने बताया कि वह छोटे खरीदारों से तीन से 10 हजार में फोन खरीदते थे। वह फोन को अनलॉक और उसका आईएमईआई नंबर बदलने के बाद उसे छह से 15 हजार में बेचता था।
जांच में पता चला कि दिल्ली व मंबई में ऐसे फोन खरीदने का गैंग सक्रिय है। सिद्धार्थ सिद्धेश के संपर्क में आने के बाद इस धंधे से जुड़ गया। उसके निर्देश पर वह दिल्ली में रहकर चोरी के फोन खरीदता था। लुकमान जामा मस्जिद के एक मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान में काम करता था। वहीं उसकी मुलाकात सलमान से हुई और वह उसे इस धंधे के बारे में बताया। वहीं सलमान करोलबाग में मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान में काम करता था और वहां जेबकतरों और झपटमारों के संपर्क में आया। इसके बाद वह सिद्धेश के संपर्क में आया और उसे ऐसे मोबाइल फोन देने लगा।