{"_id":"617bff28b95b022bc81d0b99","slug":"court-upheld-the-salary-of-security-guards-at-the-time-of-custody-parole-ashram-news-noi6131423133","type":"story","status":"publish","title_hn":"कस्टडी पैरोल के समय सुरक्षा गार्डों के वेतन को अदालत ने गलत ठहराया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कस्टडी पैरोल के समय सुरक्षा गार्डों के वेतन को अदालत ने गलत ठहराया
विज्ञापन
नई दिल्ली। अदालत ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें एक दंपती को कस्टडी पैरोल के दौरान सुरक्षा गार्डों का वेतन व अन्य खर्च के रूप में 10 लाख रुपये का भुुगतान करने का निर्देश दिया था। दंपती धोखाधड़ी के मामले में आरोपी हैं और पैरोल से वापस जेल में आने के बाद उन्हें बिल सौंपा गया था।
अपर सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने अपने फैसले में कहा कि मजिस्ट्रेट को एस्कॉर्ट स्टाफ का वेतन देने की इस मांग को लागू करने के लिए ऐसा आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है।
इस मामले के आरोपी वर्ष 2018 में बाराखंबा रोड़ थाने में दर्ज पैसे की हेराफेरी के मामला का सामना कर रहे हैं। दंपती पिछले 25 महीनों से न्यायिक हिरासत में हैं। 17 जनवरी 20 को उन्हें मजिस्ट्रेट की अदालत ने सात दिन के लिए हिरासत में पैरोल दी थी जिसे बाद में 31 जनवरी, 2020 तक बढ़ा दिया गया था।
विज्ञापन
याची ने तर्क रखा कि उन्हें पैरोल के दौरान प्रदान एस्कॉर्ट स्टाफ को भोजन, आवास और यात्रा के सभी खर्चों को वहन करने के लिए कहा जा रहा है जबकि मजिस्ट्रेट ने एस्कॉर्टिंग स्टाफ के वेतन के बारे में एक भी शब्द का उल्लेख नहीं किया था। अब तीसरी बटालियन ने एस्कॉर्ट पार्टी के लिए वेतन के रूप में 10 लाख 64 हजार 55 रुपये का बिल भेजा है तो उन्हें भुगतान के लिए कहा जा रहा है।
उन्होंने अपनी निजी हैसियत से कोई एस्कॉर्ट पार्टी नहीं ली थी और जेल अधीक्षक के निर्देशानुसार उन्हें यह सौंपा गई थी। एस्कॉर्ट स्टाफ की नियुक्ति के समय जेल प्राधिकरण ने एस्कॉर्ट स्टाफ के वेतन के बारे में कुछ नहीं कहा था।
उन्होंने कहा जेल अधिकारियों के आग्रह पर मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने 12 अगस्त 2021 को पारित एक आदेश में इसे स्वीकार कर लिया। दंपती ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि यह आदेश गलत, गैरकानूनी और कानून के विपरीत है। उन्होंने कहा कस्टडी पैरोल के समय सुरक्षा गार्डों के वेतन के भुगतान के संबंध में कोई शर्त नहीं थी।
दूसरी ओर दिल्ली सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि दिल्ली सरकार की अधिसूचना में गार्ड उपलब्ध कराने के मामले में ली जाने वाली राशि को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है और उन निर्देशों के अनुसार शुल्क लगाया गया है।
विज्ञापन
अपर सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने अपने फैसले में कहा कि मजिस्ट्रेट को एस्कॉर्ट स्टाफ का वेतन देने की इस मांग को लागू करने के लिए ऐसा आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है।
विज्ञापन
इस मामले के आरोपी वर्ष 2018 में बाराखंबा रोड़ थाने में दर्ज पैसे की हेराफेरी के मामला का सामना कर रहे हैं। दंपती पिछले 25 महीनों से न्यायिक हिरासत में हैं। 17 जनवरी 20 को उन्हें मजिस्ट्रेट की अदालत ने सात दिन के लिए हिरासत में पैरोल दी थी जिसे बाद में 31 जनवरी, 2020 तक बढ़ा दिया गया था।
विज्ञापन
याची ने तर्क रखा कि उन्हें पैरोल के दौरान प्रदान एस्कॉर्ट स्टाफ को भोजन, आवास और यात्रा के सभी खर्चों को वहन करने के लिए कहा जा रहा है जबकि मजिस्ट्रेट ने एस्कॉर्टिंग स्टाफ के वेतन के बारे में एक भी शब्द का उल्लेख नहीं किया था। अब तीसरी बटालियन ने एस्कॉर्ट पार्टी के लिए वेतन के रूप में 10 लाख 64 हजार 55 रुपये का बिल भेजा है तो उन्हें भुगतान के लिए कहा जा रहा है।
उन्होंने अपनी निजी हैसियत से कोई एस्कॉर्ट पार्टी नहीं ली थी और जेल अधीक्षक के निर्देशानुसार उन्हें यह सौंपा गई थी। एस्कॉर्ट स्टाफ की नियुक्ति के समय जेल प्राधिकरण ने एस्कॉर्ट स्टाफ के वेतन के बारे में कुछ नहीं कहा था।
उन्होंने कहा जेल अधिकारियों के आग्रह पर मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने 12 अगस्त 2021 को पारित एक आदेश में इसे स्वीकार कर लिया। दंपती ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि यह आदेश गलत, गैरकानूनी और कानून के विपरीत है। उन्होंने कहा कस्टडी पैरोल के समय सुरक्षा गार्डों के वेतन के भुगतान के संबंध में कोई शर्त नहीं थी।
दूसरी ओर दिल्ली सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि दिल्ली सरकार की अधिसूचना में गार्ड उपलब्ध कराने के मामले में ली जाने वाली राशि को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है और उन निर्देशों के अनुसार शुल्क लगाया गया है।