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हाईकोर्ट का सवाल: जब डॉक्टर ही नहीं तो बेड बढ़ाने का क्या फायदा, चुनावों में पूरे पृष्ठ के विज्ञापन, अब क्यों नहीं

Tue, 11 May 2021 01:03 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 11 May 2021 01:03 AM IST
सार

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने कहा यह समय और अधिक डॉक्टरों की जरूरत का है। अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा अगर पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं तो ज्यादा बेड होने का क्या मतलब है।

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court told to delhi government if there are not enough doctors then what is the point of having more beds
कोविड अस्पताल - फोटो : amar ujala

विस्तार

हाईकोर्ट ने ईलाज के लिए डॉक्टरों की कमी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पर्याप्त डॉक्टर व अन्य स्टाफ ही नहीं है तो बेड और वार्ड बढ़ाने का क्या है फायदा। अदालत ने यह टिप्प्णी द्वारका में नए डेडिकेटेड कोविड सुविधा वाले इंदिरा गांधी अस्पताल में पर्याप्त मेडिकल स्टाफ न होने के ध्यानार्थ की है।

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने कहा यह समय और अधिक डॉक्टरों की जरूरत का है। अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा अगर पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं तो ज्यादा बेड होने का क्या मतलब है।
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अदालत ने दिल्ली सरकार के रवैये पर हैरानी जताते हुए कहा कि अब आप कह रहे है कि डॉक्टरों की कमी का मुद्दा अदालत के सामने कभी नहीं उठाया गया है। अदालत ने कहा डॉक्टरों की कमी एक गंभीर समस्या है इससे भागा नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब चुनाव आते हैं तो हर अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापन देखे जाते हैं, लेकिन अब डॉक्टरों या नर्सिंग स्टाफ के लिए जरूरतों के संबंध में अंग्रेजी के प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में कोई विज्ञापन नहीं हैं।
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दिल्ली सरकार ने एक हिन्दी दैनिक में विज्ञापन का हवाला दिया तो अदालत ने कहा कि प्रमुख अंग्रेजी अखबारों में क्यों नहीं? दिल्ली सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि विज्ञापन जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और जल्द ही यह सभी प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में दिखाई देगा, लेकिन कुछ समय की जरूरत है।

अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हम आपको पिछले दो हफ्तों से समय दे रहे हैं। दिल्ली सरकार ने कहा कि वह वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित कर रही है और आने वाले दिनों में और अधिक जौर दिया जाएगा। 


अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह उसके सामने ब्योरा रखे जिसमें नए अस्पताल में 250 बिस्तरों के संचालन के साथ-साथ और बिना ऑक्सीजन और आईसीयू और नॉन-आईसीयू के बेड का डेटा शामिल हो, दिल्ली सरकार के मुताबिक इस अस्पताल की क्षमता 900 बेड की होगी।

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