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दिल्ली: कोरोना के दौरान बंद हुए सर्कसों के जानवारों की जानकारी न रखने पर अदालत ने लगाई कड़ी फटकार, दी अवमानना की चेतावनी
Mon, 29 Nov 2021 08:29 PM IST
सुशील कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार
Updated Mon, 29 Nov 2021 08:29 PM IST
सार
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को शपथपत्र सहित स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि देशभर में सर्कस में रखे गए जानवरों के ठिकाने की पूरी जानकारी हो।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
उच्च न्यायालय ने कोविड महामारी के दौरान बंद हुए सर्कस के जानवारों की जानकारी न रखने पर भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा इससे उनके जानवरों की देखभाल की कमी और बंदी जानवरों के प्रति स्नेह का अभाव दिखता है।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने एडब्ल्यूबीआई के सचिव को 9 फरवरी को अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को शपथपत्र सहित स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि देशभर में सर्कस में रखे गए जानवरों के ठिकाने की पूरी जानकारी हो। पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एडब्ल्यूबीआई हमारे पिछले निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं कर रहा।
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हम देशभर के चिड़ियाघरों में रखे गए जानवरों के कल्याण से चिंतित हैं जो महामारी के कारण पीड़ित हैं। बंदी जानवरों की देखभाल और ध्यान की कमी उनके लिए घातक साबित हो सकती है। ऐसा प्रतीत होता है कि एडब्ल्यूबीआई इस जरूरत के प्रति संवेदनशील नहीं है। अदालत ने कहा कि संबंधित प्राधिकरण होने के बावजूद एडब्ल्यूबीआई को सर्कस में रखे गए जानवरों और वे किस स्थिति में रहने की जानकारी नहीं है और यह बोर्ड की ओर से पूरी तरह से कर्तव्य की अवहेलना प्रतीत होती है।
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पीठ ने चेतावनी दी कि वह अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने से नहीं हिचकेगी, क्योंकि अधिकारी अदालत को हल्के में ले रहे हैं। पीठ ने कहा कि उद्देश्य विफल हो गया है और अगर अधिकारी उनकी देखभाल नहीं कर रहे हैं तो जानवर मर जाएंगे। पीठ ने एडब्ल्यूबीआई और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजैडए) की ओर से पेश अधिवक्ता राजेश गोगना के उस तर्क को खारिज कर दिया कि बोर्ड ने पिछले 15 दिनों में इस मुद्दे पर एक बैठक आयोजित करने का प्रयास किया था।
पीठ ने कहा कि इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि इन मुद्दों को पहले क्यों नहीं लिया गया, ऐसा लग रहा था कि अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। पीठ कोविड-19 महामारी के कारण देश भर में फंसे सर्कस में जानवरों की सुरक्षा के लिए पीपुल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) और फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल्स प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
पेटा इंडिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रिया हिंगोरानी ने अदालत को बताया कि कई सर्कसों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और उनके द्वारा किए गए कथित उल्लंघनों के कारण उनके पंजीकरण प्रमाण पत्र रद्द करने की मांग करने वाले उसके आवेदन पर जनवरी से कोई जवाब नहीं दिया गया। इस वर्ष और एडब्ल्यूबीआई और सीजैडए ने भी अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। उन्होंने कहा इस आवेदन का पूरा उद्देश्य सर्कस में जानवरों की स्थिति देखना है जो वर्तमान में शुरू है और जिन्हें बंद कर दिया गया है। अगस्त में उच्च न्यायालय ने एडब्ल्यूबीआई से सर्कस के बंद हो चुके जानवरों की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी।