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मतदाता सूची मुद्दे पर विपक्ष और दिल्ली सरकार में ठनी, विपक्ष ने की कार्रवाई की मांग
Thu, 28 Feb 2019 04:06 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Thu, 28 Feb 2019 04:06 AM IST
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राजधानी की मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम काटने के मसले पर बुधवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में ठन गई। नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मतदाताओं का नाम काटने के मसले पर दिल्लीवालों से झूठ बोल रहे हैं और सरकार चुनाव आयोग की रिपोर्ट छिपा रही है।
विजेंद्र गुप्ता के सवाल उठाने पर विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने चुनाव आयोग की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखवा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2015-2018 के बीच दिल्ली में 11.54 लाख वोटरों के नाम काटे गए और 18.44 लाख के जोड़े गए। विपक्ष ने सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट किया।
दरअसल, बीते साल 27 नवंबर को दिल्ली विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर सूची से लाखों मतदाताओं के नाम कटने की बात करते हुए चुनाव आयोग से रिपोर्ट तीन महीने में तलब की थी। बुधवार को यह अवधि खत्म हो रही थी। विधानसभा में विजेंद्र गुप्ता ने इससे जुड़ा सवाल उठाया। उन्होंने 2015-2018 के बीच मतदाता सूची में जुड़े व हटाए गए मतदाताओं की संख्या पूछी। सरकार ने बताया कि चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को रिपोर्ट सौंप दी है।
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इस पर नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जान-बूझकर जानकारी छिपाने की कोशिश में सदन में रिपोर्ट नहीं रख रही है। 14 दिसंबर को ही चुनाव आयोग ने जवाब दे दिया था। इसके बावजूद रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। इस पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने विजेंद्र गुप्ता को मिली रिपोर्ट पर सवाल किया।
विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने बीच में दखल देते हुए रिपोर्ट को सदन के पटल पर रख दिया। इसके बाद सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए विपक्ष सदन से वॉकआउट कर गया। विपक्ष ने जानकारी छिपाने के आरोप में नियम 106(2) तथा 66 के अंतर्गत चुनाव मंत्री इमरान हुसैन पर सदन की अवमानना की कार्रवाई की मांग की।
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विजेंद्र गुप्ता के सवाल उठाने पर विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने चुनाव आयोग की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखवा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2015-2018 के बीच दिल्ली में 11.54 लाख वोटरों के नाम काटे गए और 18.44 लाख के जोड़े गए। विपक्ष ने सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट किया।
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दरअसल, बीते साल 27 नवंबर को दिल्ली विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर सूची से लाखों मतदाताओं के नाम कटने की बात करते हुए चुनाव आयोग से रिपोर्ट तीन महीने में तलब की थी। बुधवार को यह अवधि खत्म हो रही थी। विधानसभा में विजेंद्र गुप्ता ने इससे जुड़ा सवाल उठाया। उन्होंने 2015-2018 के बीच मतदाता सूची में जुड़े व हटाए गए मतदाताओं की संख्या पूछी। सरकार ने बताया कि चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को रिपोर्ट सौंप दी है।
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इस पर नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जान-बूझकर जानकारी छिपाने की कोशिश में सदन में रिपोर्ट नहीं रख रही है। 14 दिसंबर को ही चुनाव आयोग ने जवाब दे दिया था। इसके बावजूद रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। इस पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने विजेंद्र गुप्ता को मिली रिपोर्ट पर सवाल किया।
विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने बीच में दखल देते हुए रिपोर्ट को सदन के पटल पर रख दिया। इसके बाद सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए विपक्ष सदन से वॉकआउट कर गया। विपक्ष ने जानकारी छिपाने के आरोप में नियम 106(2) तथा 66 के अंतर्गत चुनाव मंत्री इमरान हुसैन पर सदन की अवमानना की कार्रवाई की मांग की।
करीब 11 लाख वोट कटे, 18 लाख से ज्यादा जुड़े
बाद में मीडिया से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मुख्यमंत्री पर दिल्लीवालों से झूठ बोलने का आरोप लगाया। इसके लिए उन्होंने 9 फरवरी के अरविंद केजरीवाल के एक ट्वीट का हवाला दिया। इसमें केजरीवाल ने लिखा था कि चुनाव आयोग ने बीते चार साल में 24 लाख वोट काटे। इस बार भाजपा का गंदा खेल पहले से खुल गया है।
विजेंद्र गुप्ता ने चुनाव मंत्री इमरान हुसैन से मिले जवाब का हवाला देते हुए कहा कि 2015-2018 के बीच 11.54 लाख नाम काटे गए और 18.44 लाख नाम जोड़े गए। साफ है कि बीते चार साल में दिल्ली में 6.90 लाख मतदाता बढ़ गए हैं। सदन में मंत्री ने एक सवाल के जवाब में यह भी बताया कि आयोग जातीय आधार पर मतदाताओं के आंकड़े नहीं रखता। ऐसे में केजरीवाल किस आधार पर अलग-अलग जातियों के वोट कटने की बात कह रहे हैं।
विजेंद्र गुप्ता ने चुनाव मंत्री इमरान हुसैन से मिले जवाब का हवाला देते हुए कहा कि 2015-2018 के बीच 11.54 लाख नाम काटे गए और 18.44 लाख नाम जोड़े गए। साफ है कि बीते चार साल में दिल्ली में 6.90 लाख मतदाता बढ़ गए हैं। सदन में मंत्री ने एक सवाल के जवाब में यह भी बताया कि आयोग जातीय आधार पर मतदाताओं के आंकड़े नहीं रखता। ऐसे में केजरीवाल किस आधार पर अलग-अलग जातियों के वोट कटने की बात कह रहे हैं।