सीजेपी का प्रदर्शन: 'एक साल तक नहीं करेंगे शांति भंग'; दिपके, सौरव दास और रांका को इन तीन शर्तों पर मिली रिहाई
राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्यों अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने तीनों को शर्त के साथ रिहा कर दिया है। अदालत ने शर्त रखी कि वो एक साल तक शांति बनाए रखेंगे। एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे।
विस्तार
कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है। तीनों सदस्य इस निर्धारित अवधि में किसी भी प्रकार की शांति भंग करने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे। उन्हें किसी भी तरह के उपद्रव या अशांति फैलाने से पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। यह शर्त उनकी तत्काल रिहाई के लिए अनिवार्य रूप से रखी गई है। वकील रत्ना सिंह ने सामाजिक माध्यम के जरिये CJP के इन नेताओं की रिहाई से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
अदालत ने अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर मुक्त किया है। उन्हें इस अवधि के दौरान किसी भी सार्वजनिक अशांति में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। यह आदेश दिल्ली में कानून व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के प्राथमिक उद्देश्य से जारी किया गया है। अदालत का यह निर्णय सभी संबंधित पक्षों पर लागू होगा।
तीनों नेताओं की रिहाई पर सीजेपी ने सोशल मीडिया पर खुशी जताई है। 'आखिरकार दिल्ली पुलिस को अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा करना पड़ा है। कॉकरोच कभी मरते नहीं हैं।
FINALLY DELHI POLICE IS FORCED TO RELEASE ABHIJEET DIPKE, ASHUTOSH RANKA AND SAURAV DAS. Cockroaches never die 🪳
— Cockroach Janta Party - CJP (@Cockroachisback) October 11, 2026
दिल्ली पुलिस ने बताया कि अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को BNSS की धारा 126/170 के तहत एहतियातन गिरफ़्तार किया गया था। सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और आज उन्हें एसईएम कोर्ट, दिल्ली कैंट के सामने पेश किया गया। एक साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने के लिए 50,000 रुपये का जमानत बॉन्ड भरा गया और कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया।
वहीं, सोशल मीडिया पर एक वीडियो फिर से शेयर किया जा रहा है, जिसमें एक व्यक्ति गलत दावा कर रहा है कि वह दिल्ली पुलिस का सब-इंस्पेक्टर है और उसने हाल ही में चल रहे विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया है।
गुमराह करने वाली सामग्री बनाने या उसे फैलाने के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले पर पहले ही 24 जुलाई 2026 को स्पष्टीकरण जारी किया था, और इस बार उसी वीडियो को फिर से गलत इरादे से फैलाया जा रहा है। जनता को सलाह दी जाती है कि वे केवल सत्यापित आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और असत्यापित दावों को शेयर करने से बचें।
Clarification A video is being recirculated on social media in which an individual falsely claims to be a Delhi Police Sub Inspector who recently resigned from service to join the ongoing protest. Verification of Delhi Police records has revealed no Sub Inspector matching the details claimed in the video. The claim is therefore unverified and misleading. Legal action will be taken as per law against those found responsible for creating or circulating misleading content. Delhi Police had already issued a clarification on this matter on 24 July 2026 , and this time the same video is again being circulated with the malicious intent. The public is advised to rely only on verified official information and refrain from sharing unverified claims. @LtGovDelhi #DPUpdates
— Delhi Police (@DelhiPolice) October 11, 2026