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Hindi News ›   Delhi ›   Chhath in Delhi: Purvanchalis celebrated Chhath festival by giving the first arghya to the setting sun amid Corona epidemic.

दिल्ली में छठ: कोरोना महामारी के बीच डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य देकर पूर्वांचलियों ने मनाया छठ पर्व

Wed, 10 Nov 2021 09:38 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Wed, 10 Nov 2021 09:38 PM IST
सार

राजधानी में यमुना नदी के दोनों ओर किनारे आसपास समेत करीब एक हजार स्थानों पर श्रद्धालु जमा हुए और छठ पूजा की। खरना के बाद व्रतियों ने बुधवार को उपवास रखते हुए शाम को अस्तचलगामी सूर्य को पानी में खड़े होकर प्रणाम किया।

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Chhath in Delhi: Purvanchalis celebrated Chhath festival by giving the first arghya to the setting sun amid Corona epidemic.
छठ पूजा के लिए घाटों पर लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी में पूर्वांचलियों ने कोराना महामारी के मद्देनजर प्रतिबंधों और राजनीतिक घमासान के बीच बुधवार को यमुना नदी के आसपास एवं अन्य स्थानों पर छठ पूजा के मौके पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। लिहाजा लाखों श्रद्धालुओं ने छठ पर्व के तहत आस्था, श्रृद्धा और विश्वास के साथ सूर्य को पहला अर्घ्य दिया। इस दौरान तमाम घाटों पर  बाट जे पूछेला बटोहिया, ई दल कहवां जाए, तूं आन्हर रे बटोहिया ई दल सूरज बाबा के जाए...., कोपि-कोपि बोलेली छठ माता सुनुए सेवक लोग...ले ले अईह हो भईया गेहूं के मोटरिया...,उग हो सुरूज देव..., कांचे ही बांसा के बहंगिया बहंगी लचकत जाए....एवं केरवा पे फरेला घवध से ओ पे सुगा मंडराय...जैसे गीतों की गूंज रही।

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राजधानी में यमुना नदी के दोनों ओर किनारे आसपास समेत करीब एक हजार स्थानों पर श्रद्धालु जमा हुए और छठ पूजा की। खरना के बाद व्रतियों ने बुधवार को उपवास रखते हुए शाम को अस्तचलगामी सूर्य को पानी में खड़े होकर प्रणाम किया। तत्पश्चात अर्घ्य के रूप में पूजन सामग्री भावनात्मक रूप से उन्हें समर्पित की। महिलाओं के सिरों पर अर्घ्य के सामान से भरी टोकरियां रखी हुई थी। इस दौरान बच्चों का उत्साह तो स्वयं में देखने योग्य था।

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लाखों श्रद्धालुओं ने यमुना नदी के किनारे पुराना यमुना पुल, कुदसिया घाट, गीता कालोनी, बस अड्डा, चंदगी राम अखाड़ा, वजीराबाद घाट आदि घाटों के अलावा भलस्वा झील, जहांगीरपुरी, कालिंदी कुंज, नरेला, उत्तम नगर, डाबड़ी, ककरौला, बदरपुर, सरिता विहार, आश्रम, जैतपुर, संगम विहार, देवली, महरौली, पालम, महावीर एंकलेव, इंद्रप्रस्थ एक्सटेंशन, नांगलोई, सुलतानपुरी, मंगोलपुरी, नजफगढ़ आदि इलाकों के साथ-साथ पश्चिम यमुना नदी के किनारे पर छठ पूजा की, वहीं वे सायंकाल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद बृहस्पतिवार की सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर रूक गए। वह घाटों पर पूरी रात रहेंगे, घाटों पर दीप व बिजली की लड़ियों की रोशनी की गई है।

कोरोना महामारी के कारण इस बार श्रद्धालु घाटों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आयोजन नहीं कर सके। इसके अलावा वे लाउड स्पीकर के माध्यम से भी छठ मैय्या का गुणगान नहीं कर सके। हालांकि श्रद्धालु नए कपड़े पहनने के साथ-साथ पूरी तरह सजधज कर पूर्जा करने पहुंचे।

छठ पूजा के दौरान कई रंग दिखाई दिए
कोरोना महामारी के मद्देनजर विभिन्न प्रतिबंधों के कारण छठ पूजा करने के कई रंग दिखाई दिए। इस बार यमुना नदी में पूजा पर रोक होने के कारण श्रद्धालुओं ने नदी के किनारे कृत्रिम घाटों पर पूजा की। इसके अलावा वे पार्कों एवं अन्य इलाकों में खाली स्थान पर बने कृत्रिम घाटों पर पूजा करने पहुंचे, वहीं बहुत से श्रद्धालुओं ने अपने घरों की छत, परिसर एवं गली में टप में खड़े होकर पूजा की। जमुना बाजार में यमुना नदी के किनारे कुछ श्रद्धालुओं ने टप में पूजा की, दरअसल नदी में प्रवेश करने पर प्रतिबंध के कारण उन्होंने यह व्यवस्था की।

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