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उम्मीदों का शहर : ब्लैक बोर्ड बने ‘स्मार्ट’, पेन ड्राइव में सिमटा किताबों का संसार

Mon, 28 Feb 2022 04:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 28 Feb 2022 04:57 AM IST
सार

प्रतिष्ठित सेवा के सपनों को सींचने के लिए आधुनिक रूप से होती है पढ़ाई। अब कहीं भी कभी भी नीति पर शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं छात्र-छात्राएं।

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Blackboard becomes smart and world of books now opens in pen drive
फिर आबाद है मुखर्जी नगर... - फोटो : amar ujala

विस्तार

सिविल सेवा की तैयारी के लिए मुखर्जी नगर और पुराने राजेंद्र नगर इलाके में पेइंग गेस्ट (पीजी) की व्यवस्था होने पर छात्र-छात्राओं का अगला पड़ाव कोचिंग सेंटर होता है। कदम-दर-कदम पर स्थित छोटे-बड़े हजारों कोचिंग सेंटर सपनों को पंख लगाने का दावा करते नजर आ जाएंगे। निजी लाइब्रेरियां भी रातभर रोशन होने के लिए कम दामों में बेहतर सुविधा की दौड़ में हैं। हालांकि, कोरोना महामारी के बाद से यहां की पढ़ाई को भी डिजिटल कर दिया गया है। अब ब्लैक बोर्ड की जगह स्मार्ट बोर्ड और मोटी-मोटी किताबों की जगह पेन ड्राइव ने ले ली है। या यूं कहें कि शिक्षा ग्रहण करने के लिए पहले पाठशाला जाना होता था, लेकिन अब ऑनलाइन माध्यम से गुरुजी स्वयं ही घर पहुंच जाते हैं।

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सामान्य कक्षा की जगह होता है आधुनिक थियेटर का अहसास 
कोचिंग सेंटरों में अब पढ़ाई पूरी तरह से अत्याधुनिक है। आधुनिक बल्बों की रोशनी से नहाए कक्षा हॉल में अब पंक्ति में आखिरी छोर पर बैठे विद्यार्थी का भी ध्यान रखा गया है। यहां एलसीडी स्क्रीन के साथ हाईटेक स्पीकर भी लगाए गए हैं। ब्लैक बोर्ड को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, जिनकी जगह अब स्मार्ट बोर्ड आ  गए हैं। मोटी किताबों को पेन ड्राइव में समेट दिया गया है। ऐसे में यहां पहुंचने पर छात्रों को किसी सामान्य कक्षा का नहीं, बल्कि आधुनिक थियेटर का अहसास होता है। भूगोल विषय के मानचित्र समझना हो या फिर भारतीय इतिहास से रूबरू होने की बात हो, स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से यह अब और भी आसान हो गया है। निजी कोचिंग सेंटर संचालक बताते हैं कि अब पहले की तरह लिखकर छात्रों को पढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती है। पठन सामग्री को स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से समझाया जाता है। इससे शिक्षकों के साथ-साथ प्रतियोगी छात्रों का भी समय बचता है। 
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कक्षाएं खुद पहुंचती हैं घर
कोचिंग सेंटर संचालक बताते हैं कि दूरदराज के कई छात्र-छात्राएं दिल्ली में मौजूद शिक्षकों से ही पढ़ना चाहते हैं, लेकिन कोरोना समेत अन्य कारणों की वजह से वे दिल्ली आने में असमर्थता जताते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए अब वीडियो रिकॉर्ड करने के साथ लाइव टेलिकास्ट किया जाता है। छात्रों की सुविधा के लिए प्रत्येक वीडियो को तीन एंगल से रिकॉर्ड किया जाता है। इसके लिए प्रत्येक कक्षा में तीन आधुनिक कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है। कक्षा शुरू होने से पहले ही बच्चों के पास संदेश पहुंच जाता है। बच्चे कहीं भी और कभी भी रिकॉर्ड वीडियो को देख सकते हैं। पहले बच्चों के कक्षा में जाने की जरूरत होती थी, लेकिन अब कक्षा खुद बच्चों के घरों में पहुंच रही है। 
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लाइब्रेरी में दी जाती है मेंटोर की सुविधा 
पढ़ने का माहौल देने के उद्देश्य से यहां लाइब्रेरी की भी अपनी दुनिया है, जहां सैकड़ों लाइब्रेरी रातभर रोशन होने की जद्दोजहद में है। इसके लिए कोचिंग संस्थानों की ओर से छात्रों को मेंटोर की भी सुविधा दी जा रही है, जो उन्हें समय प्रबंधन के साथ-साथ भविष्य के लिए तैयार करने में मदद करते हैं। प्रतिस्पर्धा की दौड़ में शामिल यहां लाइब्रेरी का अलग-अलग दाम है। कुछ लाइब्रेरी की सुविधा 500 रुपये है तो कुछ लाइब्रेरी 1500  रुपये में एसी, हीटर व अन्य सुविधा के संसाधन उपलब्ध करने का दावा ठोकती हैं।

ऊंचे दाम देने पर ही सपनों को लगते हैं पंख

  • निजी कोचिंग सेंटरों में कोर्स की फीस एक लाख से लेकर दो लाख रुपये तक है।
  • छात्रों की सुविधा को देखते हुए कोचिंग संस्थान द्वारा हर तीन माह में शुरू किए जाते हैं नए बैच।
  • फीस का भुगतान करने के लिए किस्तों की भी दी जाती है सुविधा।
  • छोटे कोचिंग संस्थानों में उच्च तकनीक के कम मौजूद हैं साधन।

स्मार्ट बोर्ड की मदद से छात्रों को भूगोल, इतिहास व अन्य विषयों से जुड़े तथ्यों को आसानी से समझाया जाता है। इससे शिक्षकों के साथ प्रतियोगी छात्रों के समय


की भी बचत होती है।
- गौरव बाना, डिविजनल प्रमुख, निजी कोचिंग सेंटर 

कोरोना के बाद से कोचिंग संस्थानों को पढ़ाई के हाईब्रिड करने का अवसर प्रदान किया है। इसके लिए अलग-अलग टीमों को तैयार किया गया है, जो बच्चों की
तैयारी करने में मदद करती हैं।  
- संदीप, कोचिंग काउंसलर, निजी कोचिंग सेंटर 

छात्रों ने कहा...
पहले के मुकाबले अब पढ़ाई में काफी बदलाव हुए हैं। कुछ विषयों में उच्च तकनीक का काफी लाभ देखने को मिलता है। इससे विषयों के तथ्यों को लंबे समय तक
याद रखने में मदद मिलती है।
- अविनाश, मधेपुरा (बिहार)

कोचिंग सेंटरों द्वारा हाईब्रिड मोड में पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने से कोर्स जल्दी पूरा हो जाता है। इससे परीक्षा की तैयारी के लिए अधिक समय मिल जाता है। पढ़ाई के
दौरान दिखाए जाने वाले ग्राफिक्स परीक्षा के दौरान काफी मददगार साबित होते हैं।
- विनय, बागपत (उत्तर प्रदेश)

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