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दिल्ली हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणी: पुलिस हिरासत में पीटा जाना जॉर्ज फ्लॉयड के मामले की याद दिलाता है

Mon, 08 Nov 2021 10:29 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Mon, 08 Nov 2021 10:29 PM IST
सार

अदालत ने पुलिस हिरासत में मारपीट मामले में गंभीर टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि कानून लोगों को पुलिस हिरासत और पूछताछ के दौरान पीटने की अनुमति नहीं देता क्योंकि अपराध के लिए सजा अदालत तय करती है।
 

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Beaten up in police custody reminds of George Floyd case says Delhi High Court 
दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : ANI

विस्तार

मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं, किसी को भी जॉर्ज फ्लॉयड जूनियर के इन शब्दों को दोहराना न पड़े। ये बात हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में कथित रूप से पीटे जाने वाले दो पीड़ितों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कही। हाईकोर्ट ने कहा कि कानून लोगों को पुलिस हिरासत और पूछताछ के दौरान पीटने की अनुमति नहीं देता क्योंकि अपराध के लिए सजा अदालत तय करती है। पीड़ितों ने इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से शुरुआती जांच कराने का निर्देश देने का आग्रह किया है। 
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गत वर्ष अमेरिका में अफ्रीकी मूल के अमेरिकी जॉज फ्लॉयड जूनियर का वो वीडियो सामने आने के बाद काफी हंगामा मचा था जिसमें हिरासत के दौरान एक पुलिसकर्मी अपने घुटने से उसकी गर्दन दबाता हुआ दिख रहा था। वहीं फ्लॉयड गिड़गिड़ा रहा था कि वह सांस नहीं ले पा रहा है। 
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न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने याचिका के साथ पेश किए गए फोटोग्राफ देखने के बाद कहा कि याचिकाकर्ताओं पर पुलिस की हिंसा बड़ा सवाल खड़ा करती है क्योंकि कानून किसी से भी पुलिस हिरासत या पूछताछ के दौरान पीटने की अनुमति नहीं देता। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी हिंसा या अपराध के लिए सजा तय करना अदालत का काम है। पुलिस अपने ही मामले में जज नहीं बन सकती। 
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अदालत ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों या पुलिस द्वारा उनके उल्लंघन या बेरहमी या बेकाबू होने के हालात में अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होती जिससे दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं और हादसे होते हैं। मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं किसी को भी फ्लॉयड के इन शब्दों को दोहराने की नौबत न आए। 

अदालत ने इस मामले में दिल्ली पुलिस के सतर्कता उपायुक्त को जांच करने और याचिका पर प्रतिवेदन के रूप में विचार करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं का पक्ष उनके वकीलों के जरिये सुना जाए। इसके बाद दो सप्ताह के भीतर प्रतिवेदन पर की गई कार्रवाई से याचिकाकर्ताओं को सूचित किया जाए।
 
पेश याचिका दायर कर दो लोगों ने दावा किया है कि उन्हें दो अन्य लोगों के साथ थाना चांदनी महल की पुलिस चौकी तुर्कमान गेट के पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह पीटा, अवैध हिरासत में रखा और प्रताड़ित किया। इन पुलिस वालों ने ऐसा कुछ लोगों के कहने पर किया। 

याची पर अधिवक्ता एम सूफीयान सिद्दीकी ने कहा इस मामले में उनके मुवक्किलों के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। वहीं दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि इन लोगों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की गई क्योंकि इससे पहले वहां घटना हुई थी। 


वकील ने कोर्ट वह वीडियो दिखाई जिसमें थाने के बाहर दो पक्षों के बीच हंगामा दिख रहा है। वहां पुलिस को पहुंच कर इसे रोकना पड़ा क्योंकि इससे 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर इलाके में कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा था।
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