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उपराज्यपाल द्वारा एसपीपी की नियुक्ति गैरकानूनी : दिल्ली सरकार
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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को उच्च न्यायालय को बताया कि इस साल गणतंत्र दिवस हिंसा और पिछले साल के दंगों से जुड़े मामलों में पुलिस द्वारा चुने गए वकीलों को उपराज्यपाल द्वारा विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) नियुक्त करने से जांच एजेंसी और सरकारी पक्ष के बीच ‘कोई अंतर’ नहीं रह जाएगा। ये निर्णय पूरी तरह गैरकानूनी है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में अभियोजक अदालत के अधिकारी होते हैं लेकिन इस समय अभियोजकों और पुलिस के बीच पूरा तालमेल है।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा, पुलिस और अभियोजन में आज कोई अंतर नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि आज समूची दंड प्रक्रिया में किस तरह की निष्पक्षता रह गई है? उन्होंने कहा कि अभियोजकों की नियुक्ति सरकार के अधिकार क्षेत्र में है और उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह मानने के लिए बाध्य हैं।
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वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मामला बहुत जरूरी है, लेकिन प्रतिवादियों उपराज्यपाल और केंद्र ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है।
पीठ ने केंद्र सरकार, उपराज्यपाल व अन्य को मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 28 जनवरी तय की है। दिल्ली सरकार ने वकीलों को एसपीपी के रूप में नियुक्त करने के उपराज्यपाल के 23 जुलाई के आदेश को चुनौती दी है।
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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में अभियोजक अदालत के अधिकारी होते हैं लेकिन इस समय अभियोजकों और पुलिस के बीच पूरा तालमेल है।
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दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा, पुलिस और अभियोजन में आज कोई अंतर नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि आज समूची दंड प्रक्रिया में किस तरह की निष्पक्षता रह गई है? उन्होंने कहा कि अभियोजकों की नियुक्ति सरकार के अधिकार क्षेत्र में है और उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह मानने के लिए बाध्य हैं।
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वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मामला बहुत जरूरी है, लेकिन प्रतिवादियों उपराज्यपाल और केंद्र ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है।
पीठ ने केंद्र सरकार, उपराज्यपाल व अन्य को मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 28 जनवरी तय की है। दिल्ली सरकार ने वकीलों को एसपीपी के रूप में नियुक्त करने के उपराज्यपाल के 23 जुलाई के आदेश को चुनौती दी है।