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एपीपी की नियुक्ती: कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा- समय लग रहा तो जल्द करें एसपीपी नियुक्त, सचिव को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

Mon, 12 Jul 2021 06:48 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Mon, 12 Jul 2021 06:48 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह प्रक्रिया पिछले छह महीने से चल रही है। क्या बिना एपीपी के आपराधिक मामले की सुनवाई की जा सकती है।

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Appointment of APP high Court to Delhi government taking time so appoint SPP soon instruct secretary to file affidavit
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को निचली अदालतों में अतिरिक्त लोक अभियोजकों (एपीपी) की नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित करने के मुद्दे पर जवाब मांग है। अदालत ने सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि इस संबंध में सार्वजनिक नोटिस कब तक जारी होगा। अदालत ने इस मामले में ठोस कदम न उठाने पर नाराजगी भी जताई है।

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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह प्रक्रिया पिछले छह महीने से चल रही है। क्या बिना एपीपी के आपराधिक मामले की सुनवाई की जा सकती है। अदालत ने कहा एक अदालत में कम से कम दो एपीपी की आवश्यकता होती है, जब भी कोई नया न्यायालय बनाया जाता है, तो एपीपी के पद का भी सृजन किया जाना चाहिए। दो एपीपी स्वीकृत होने जरूरी हैं अन्यथा न्यायाधीश या बचाव पक्ष के वकील अभियोजक के बिना क्या करेंगे?
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अदालत ने कहा यदि नियमित प्रक्रिया में समय लगता है, तो सरकार तुरंत विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) नियुक्त करें। अदालत ने दिल्ली अभियोजक कल्याण संघ की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें राजधानी में एपीपी के पदों का सृजन करने और फिर उन्हें 55 फास्ट-ट्रैक और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी (पोक्सो) अधिनियम की अदालतों में नियुक्त करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
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पीठ ने दिल्ली सरकार के सचिव (गृह) को अगली तारीख को या उससे पहले हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से एपीपी के लिए आवेदन आमंत्रित करने संबंधी सार्वजनिक नोटिस जारी करने का कम से कम संभावित समय बताने को भी कहा ताकि काम जल्द से जल्द पूरा किया जा सके। अदालत ने मामले की सुनवाई 26 जुलाई तय की है।

याची की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष मोहन ने अदालत को बताया कि पहले अभियोजन निदेशालय (डीओपी) के आदेश के अनुसार एपीपी के 73 पद सृजित किए जाने थे, हालांकि, अब दिल्ली सरकार द्वारा दाखिल की गई स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है कि पद घटाकर 18 कर दिये गये है। 

याचिका में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय ने 2019 में प्रत्येक जिले में विशेष पॉक्सो अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया था, जहां पॉक्सो अधिनियम के तहत 100 से अधिक मामले हैं। राजधानी में बलात्कार और पोक्सो अधिनियम के मामलों के लंबित होने के आधार पर कुल 16 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों को स्थापित करने का प्रस्ताव है।

दिल्ली सरकार के स्थायी वकील संतोष कुमार त्रिपाठी के माध्यम से दाखिल रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले दो प्रस्ताव प्रशासनिक सुधार विभाग को एपीपी के 73 पद सृजित करने के लिए भेजे गए थे, लेकिन इसे इस आधार पर डीओपी को वापस कर दिया गया कि इन्हें उचित नहीं पाया गया है। 

प्रशासनिक सुधार विभाग ने कहा था कि पॉक्सो और फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों में दो एपीपी तैनात करने के लिए प्रशासनिक विभाग की दलील अनुचित लगती है। इसके बाद, डीओपी ने एपीपी के 18 पदों के सृजन के लिए एक संशोधित प्रस्ताव के साथ फाइल को फिर से जमा किया था और यह प्रशासनिक सुधार विभाग में प्रक्रियाधीन है।

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