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Delhi News : 1800 करोड़ से साफ होंगी तीनों लैंडफिल साइट, दिल्ली नगर निगम ने केंद्र सरकार से मांगा पैसा
Sat, 11 Jun 2022 05:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 11 Jun 2022 05:06 AM IST
सार
मौजूदा समय में गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट पर करीब 280 मीट्रिक टन कचरा इकट्ठा है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने जिम्मेदारी संभालने के बाद लैंडफिल साइट की सफाई को पहली प्राथमिकता के तौर पर स्वीकार किया है।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली नगर निगम को 1800 करोड़ रुपये मिलेंगे, तभी तीनों लैंडफिल साइट साफ हो पाएंगी। एमसीडी ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार से यह पैसा मांगा है।
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मौजूदा समय में गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट पर करीब 280 मीट्रिक टन कचरा इकट्ठा है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने जिम्मेदारी संभालने के बाद लैंडफिल साइट की सफाई को पहली प्राथमिकता के तौर पर स्वीकार किया है। उन्होंने 30 मई को गाजीपुर लैंडफिल साइट का दौरा किया और चार जून को ओखला लैंडफिल साइट का निरीक्षण किया। इसके बाद एलजी ने कचरे के पहाड़ को खत्म करने के लिए एमसीडी से एक्शन प्लान मांगा।
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एमसीडी ने उन्हें जो एक्शन प्लान दिया, उससे एलजी संतुष्ट नहीं हुए। अब उन्होंने एमसीडी को सालभर के भीतर लैंडफिल साइट को समाप्त करने का एक्शन प्लान तैयार करने के लिए कहा है।
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अब तक 90 करोड़ रुपये मिले
एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक 1800 करोड़ में से केंद्र सरकार ने 775 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार को दे दिए हैं। एमसीडी को दिल्ली सरकार के माध्यम से पैसा मिलता है। ऐसे में दिल्ली सरकार से एमसीडी को उस पैसे में से अभी 174 करोड़ रुपये देने पर सहमति बनी है, जिसमें से केवल 90 करोड़ रुपये अभी तक मिले हैं।
10000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है रोज
दिल्ली में रोज 10000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसमें से करीब 2000 मीट्रिक टन कचरा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट पर जाता है, जबकि 6000 मीट्रिक टन कचरा भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट पर भेजा जाता है।
एनएचएआई ले रहा कचरे से निकली मिट्टी
मौजूदा समय में एमसीडी के वेस्ट टू एनर्जी प्लांट से निकलने वाली इनर्ट (निष्क्रिय कचरे वाली मिट्टी) का केवल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा उपयोग किया जा रहा है। एनएचएआई इसे मीठापुर और द्वारका की अपनी साइट पर सड़कों की भराई में इस्तेमाल कर रहा है। इसके अलावा एनटीपीसी ने एनएचएआई को पौधरोपण करने के लिए जगह दी है। इस गहरी जगह को समतल करने के लिए भी इस मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है।
डीडीए से जमीन मांगी : एमसीडी ने करीब 85 लाख मीट्रिक टन इनर्ट रखने के लिए डीडीए से जमीन मांगी है। डीडीए से इसको लेकर बातचीत जारी है। इसके अलावा दिल्ली एनसीआर के भवन निर्माण से जुड़े ठेकेदारों से भी संपर्क किया जा रहा है। वह इस मिट्टी का उपयोग कर सकते हैं।