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Hindi News ›   Delhi ›   Air Pollution: The situation in November was the most severe in the last five years, after 2016, the air condition remained severe for 10 days this year

वायु प्रदूषण: बीते पांच सालों में सबसे खराब रहे नवंबर के हालात, 2016 के बाद इस वर्ष 10 दिन गंभीर रही हवा की स्थिति

Sun, 28 Nov 2021 07:04 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Sun, 28 Nov 2021 07:04 PM IST
सार

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) 2015 से वायु गुणवत्ता को लेकर आंकड़े जारी कर रहा है। बीते वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालने से स्पष्ट होता है 2016 के बाद इस वर्ष नवंबर में 10 दिन जहरीली हवा रिकॉर्ड की गई है। बहुत खराब श्रेणी की हवा वाले दिन 16 व दो दिन खराब श्रेणी के रहे हैं।

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Air Pollution: The situation in November was the most severe in the last five years, after 2016, the air condition remained severe for 10 days this year
दिल्ली में प्रदूषण - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली की हवाएं गुजरे पांच सालों में इस नवंबर में सबसे दमघोंटू रही हैं। 10 दिनों तक दिल्ली वालों ने जहरीली हवा में सांस ली। हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर पर बनी रही, जबकि बेहद खराब हवा वाले दिन 16 रहे हैं। इस हवा में सांस लेना सेहत के लिए खतरनाक होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की उठा पटक के साथ पराली के धुएं और दिवाली के धमाकों ने दिल्ली की हवा को धुआं-धुआं सा कर दिया है।

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) 2015 से वायु गुणवत्ता को लेकर आंकड़े जारी कर रहा है। बीते वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालने से स्पष्ट होता है 2016 के बाद इस वर्ष नवंबर में 10 दिन जहरीली हवा रिकॉर्ड की गई है। बहुत खराब श्रेणी की हवा वाले दिन 16 व दो दिन खराब श्रेणी के रहे हैं। यानि दिल्ली वासियों को एक भी दिन साफ हवा नसीब नहीं हुई है। वहीं, 2015 से 2020 के बीच कोई ऐसा साल नहीं आया जिसका नवंबर इस तरह की जहरीली हवाओं के बीच न गुजरा हो। सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में नौ दिन हवा का स्तर गंभीर श्रेणी में रहा। 2019 में सात, 2018 में पांच, 2017 में सात, 2016 में 10 व 2015 में छह दिन हवा दमघोंटू बनी रही।
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देरी से लौटा मानसून, बढ़ा पराली का धुआं
पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं कि इस बार देरी से मानसून के आगमन व लौटने की वजह से प्रदूषण के दिन बढ़े हैं। इस वर्ष 13 जुलाई को बीते नौ वर्षों में सबसे देरी के साथ मानसून ने दिल्ली में दस्तक दी थी और अगस्त के अंतिम दिनों में वापसी की थी। इससे पहले वर्ष 2012 में सात जुलाई को मानसून दिल्ली पहुंचा था। वहीं,  2006 में नौ जुलाई, 2002 में 19 जुलाई और 1987 में 26 जुलाई को मानसून आगमन हुआ था।

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आमतौर पर दिल्ली जून के अंत तक दिल्ली में मानसून का आगमन हो जाता है। यही वजह रही कि मानसून के देरी से आगमन व लौटने के कारण पड़ोसी राज्यों में पराली जलने की घटनाएं देरी से रिकॉर्ड की गईं। बीते अक्तूबर के आंकड़ों से गौर करें तो 20 से 30 अक्तूबर तक पराली जलने की कम घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। 30 अक्तूबर तक प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी अधिकतम 20 फीसदी पहुंची थी, जबकि नवंबर के पहले सप्ताह में 36 फीसदी तक पहुंच गया।

सप्ताह के अंत तक पराली का धुआं 48 फीसदी तक दर्ज किया गया जो कि इस सीजन की सबसे अधिक पराली के धुएं की हिस्सेदारी दर्ज की गई थी। सफर के आंकड़ों के मुताबिक, नौ से 13 नवंबर के बीच पराली के धुएं की हिस्सेदारी 30 फीसदी तक रिकॉर्ड की गई है, जबकि 30 अक्तूबर से तीन नवंबर तक प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी सिर्फ आठ फीसदी रही थी।

दिवाली के बाद बिगड़े हालात
राजधानी में प्रदूषण को लेकर सबसे अधिक हालात दिवाली के बाद बिगड़े। चार नवंबर को पटाखों के साथ पराली के धुएं ने भी दिल्ली की हवा को प्रदूषित किया। यही वजह रही कि पांच नवंबर को दिल्ली का एक्यूआई 462 के स्तर पर पहुंच गया। इस दिन पराली के धुएं की हिस्सेदारी 41 फीसदी रही थी। पांच से सात नवंबर लगातार तीन दिनों तक हवा गंभीर श्रेणी में रही थी। इसके बाद 11 नवंबर से 13 नवंबर तक हवा की स्थिति गंभीर रही। इस बीच 12 नवंबर को 471 एक्यूआई के साथ आपातकाल जैसी स्थिति हो गई थी। इसके बाद 25 नवंबर से 28 नवंबर तक लगातार हवा गंभीर श्रेणी में बनी हुई है।

बीते पांच सालों में दिल्ली में वाहनों का दबाव भी बढ़ा है। इसके अलावा प्रदूषण फैलानी वाली अन्य गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। दूसरी ओर मानसून का देरी से आगमन और पराली जलने पर प्रभाव पड़ने से प्रदूषण के स्तर पर प्रभाव पड़ा है। मौसमी दशाओं ने भी दिल्ली के प्रदूषण को बढ़ाने में मदद की है। इस वजह से प्रदूषण के अधिक दिन दर्ज किए गए हैं।
-डॉ. एसके त्यागी, पूर्व अतिरिक्त निदेशक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

दिल्ली में अपना प्रदूषण पहले से ही मौजूद है। दिवाली पर जलने वाले पटाखे व पराली का धुआं इसका और बढ़ाने में और मदद कर देते हैं। इस वजह से दिल्ली के  हालात बिगड़ जाते हैं। दिल्ली के प्रदूषण को कम करना है तो धरातल पर काम करने की जरूरत है।
-भुवन भास्कर, पर्यावरण विशेषज्ञ

दिल्ली    नवंबर में गंभीर श्रेणी के दिन
2021    10
2020    09
2019    07
2018    05
2017    07
2016    10
2015    06

2021 में 28 नवंबर तक हवा की स्थिति  
गंभीर श्रेणी के दिन- 10
बहुत खराब श्रेणी के दिन-  16
खराब श्रेणी के दिन-     02
साफ रही हवा के दिन -  शून्य

2021 नवंबर में कब से कब तक गंभीर रही हवा
-पांच से सात नवंबर
-11 से 13 नवंबर
-25 से 28 नवंबर
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