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वायु प्रदूषण : स्रोत का पता लगाएगा नया मॉडल, आसाना होगा व्यावहारिक अनुमान

Sun, 25 Jul 2021 05:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली   Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 25 Jul 2021 05:54 AM IST
सार

  • डिसीजन सपोर्ट सिस्टम दिल्ली व आसपास के 19 जिलों में प्रदूषण के प्रत्येक स्रोत का लगाएगा पता

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Air pollution: New model will find the source
दिल्ली में वायुप्रदूषण - फोटो : PTI

विस्तार

सर्दियों के दौरान उत्तर पश्चिमी भारत और दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से गंभीर समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने एक डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) विकसित किया है। इससे न केवल इन जिलों के प्रदूषण के स्रोतों की जानकारी मिलेगी, बल्कि व्यावहारिक परिदृश्य का अनुमान लगाना भी आसान होगा। पुणे स्थित भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह मॉडल अक्तूबर में प्रयोग के लिए उपलब्ध होगा। 

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आईआईटीएम के परियोजना प्रमुख सचिव घुड़े ने बताया ‘दिल्ली और आसपास के 19 जिलों में प्रदूषण के प्रत्येक स्रोत का पता लगाने के लिए मॉडल विकसित किया गया है। प्रत्येक जिले व औद्योगिक गतिविधि के हिसाब से उसे महत्व दिया जाएगा। इसी आधार पर संबंधित जिले की प्रत्येक गतिविधि के हिसाब से रोकथाम के लिए कार्य योजना को तैयार किया जाएगा। व्यावहारिक परिदृश्य अनुमान से प्रदूषण के स्तर और उसके स्रोतों के विषय में जानकारी मिलेगी। इससे सरकार इस दिशा में आवश्यक कदम उठा सकती है। 
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इससे वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।’ वर्तमान में आईआईटीएम वर्ष 2018 से दिल्ली के लिए तीन दिवसीय व 10 दिवसीय पूर्वानुमान जारी करता है। इस आधार पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) आवश्यक कदम उठाता है। इसमें निर्माण गतिविधियों पर अस्थाई विराम और परिवहन के मोर्चे पर गतिविधियों को सीमित करने जैसे कई कदम उठाए जाते हैं।
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मॉडल से क्षेत्रवार योजना बनाने में मिलेगी मदद
सर्दियों में दिल्ली और आसपास के जिलों में प्रदूषण खतरे की सीमा के पार चला जाता है। ऐसे में डीसीएस की मदद से पूर्व अनुभव के आधार पर ठोस निर्णय लेने में मदद मिलेगी। वायु प्रदूषण को मुख्तलिफ इलाकों में रोकने के लिए क्षेत्रवार योजना भी बनाने में मदद मिलेगी। प्रदूषण के योगदान और उसके रोकथाम के नतीजों पर पहुंचा जा सकेगा। 


मेरठ में प्रदूषण के दिल्ली पर असर की कर सकेंगे पड़ताल
डीएसएस मॉडल पता लगा सकेगा की परिवहन व औद्योगिक क्षेत्र की किस दिन की गतिविधियों से किसी दिन विशेष में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पर कितना प्रभाव पड़ा। या पंजाब, हरियाणा व यूपी में पराली जलाने से एक दिन में एक्यूआई कितना प्रभावित हुआ। यह मॉडल जिलेवार वस्तु स्थिति को दर्शाने में सक्षम है, जैसे यह मेरठ में प्रदूषण और उसके दिल्ली पर पड़ने वाले असर की पड़ताल करने में कारगर साबित हो सकता है। उसके आधार पर आवश्यकता और अपेक्षा के अनुरूप रणनीति बनाने में सहूलियत होगी। 
 

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