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पंजाब चुनाव के बाद : वैश्यों के बाद पंजाबियों में भी बढ़ी आप की पैठ
Fri, 11 Mar 2022 05:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा
नवनीत शरण, नई दिल्ली
नवनीत शरण, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 11 Mar 2022 05:31 AM IST
सार
भाजपा को दिल्ली में दमदार मौजूदगी दिखाने के लिए बदलनी पड़ सकती है रणनीति।
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पंजाब में आप का परचम
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पंजाब विधानसभा चुनाव जीत से दिल्ली में आम आदमी पार्टी और मजबूत हो गई है। पहले तो आप ने भाजपा के कोर वोटर वैश्य समाज का दिल जीता और अब पंजाबी वोट बैंक में भी सेंध लगना तय है। पंजाब में सभी दलों पर जीत का सीधा असर आगामी एमसीडी चुनाव पर दिखने के आसार हैं। पश्चिमी व पूर्वी दिल्ली के पंजाबी-सिख बाहुल्य वार्डों में भाजपा को अपने जनाधार को बनाए रखना बेहद चुनौती भरा होगा। वहीं, पार्टी दफ्तर में भाजपा नेताओं का मंथन चलता रहा।
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एकीकृत एमसीडी करने के नाम पर दिल्ली एमसीडी चुनाव भले ही टल गया हो, लेकिन कांग्रेस व भाजपा के लिए एमसीडी में काबिज होना आसान नहीं होगा। पंजाब में सत्ता परिवर्तन से यह साबित हो गया है कि आम आदमी पार्टी की पैठ पंजाबी-सिख समाज में मजबूत हुई है। दिल्ली भाजपा कई मौके पर पंजाबी चेहरे को आगे करके चुनाव जीतती रही है।
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पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना हो या पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा। इसी तरह पार्टी ने किरण बेदी व सुषमा स्वराज को भी दिल्ली में आजमाया। कांग्रेस पार्टी की चेहरा भी पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, मंत्री एके वालिया रहे। हालांकि, पूर्वांचल के लोगोें की तादाद बढ़ने के बाद यह परंपरा टूटी है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के वैश्य बाहुल्य इलाके, जो भाजपा का गढ़ माने जाते थे, उनमें भी आम आदमी पार्टी ने परचम लहराया।
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अब पंजाब चुनाव ने यह तय कर दिया है कि वहां से चली जीत की लहर दिल्ली के पंजाबी बाहुल्य विधानसभा सीट, एमसीडी वार्ड व पंजाबी-सिख समुदाय पर भी प्रभाव डाल सकती है।
एमसीडी चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की उम्मीद कम
दिल्ली भाजपा को उम्मीद थी कि पंजाब में कांग्रेस की सत्ता दोबारा आती है तो दिल्ली में भी कांग्रेस की स्थिति मजबूत होगी, लेकिन पंजाब में मिली निराशा के बाद दिल्ली कांग्रेस का मनोबल भी एमसीडी चुनाव में टूटा रहेगा। ऐसे में त्रिकोणीय मुकाबला की स्थिति नहीं बनेगी। भाजपा रणनीतिकारों का मानना है कि कई राज्यों में देखा गया है जहां त्रिकोणीय चुनाव होता है वहां भाजपा की स्थिति मजबूत रहती है।
भाजपा को गुजरात विधानसभा चुनाव से संजीवनी की उम्मीद
पंजाब में आप की जीत के बाद दिल्ली की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इसका आंकलन शुरू हो गया है। इस साल के अंत में गुजरात विधानसभा चुनाव होना है। इसे प्रदेश भाजपा नेता आगामी एमसीडी चुनाव के लिए संजीवनी मान कर चल रहे हैं। यदि एमसीडी चुनाव गुजरात चुनाव परिणाम आने के बाद होते हैं तो फिर जीत की उम्मीद बढ़ जाएगी। चुनावी जानकारों की मानें तो कोशिश यही होगी कि एमसीडी चुनाव को जितना टाला जा सके बेहतर होगा। क्योंकि, पंजाब चुनाव जीतने के बाद दिल्ली के आप कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है।
यूपी में जीत से भाजपा में खुशी पंजाब में आप के आने से चिंता
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत से दिल्ली भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर तो है, लेकिन पंजाब में आम आदमी पार्टी के काफी मजबूत होने से चिंता भी कम नहीं है। एमसीडी चुनाव को लेकर भाजपा पहले से ही हार-जीत के आंकलन में उलझी थी तो अब पंजाब में आप का परचम लहराने से मुसीबत बढ़ गई है। सबसे अधिक मुश्किल दिल्ली कांग्रेस को होगी। पांचों राज्यों में बेहतर प्रदर्शन नहीं होने की स्थिति में कार्यकर्ताओं में भी निराशा है। हालांकि, एमसीडी चुनाव में अभी काफी वक्त है।
केजरीवाल का कद हुआ बड़ा, भाजपा के लिए चुनौती
पंजाब चुनाव जीतने के बाद केजरीवाल का कद और बड़ा हो गया है। ये दिल्ली भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। दिल्ली भाजपा को भी किसी कद्दावर नेता को दिल्ली की राजनीति में सक्रिय करना होगा। तभी मुख्यमंत्री को चुनौती मिल पाएगी।