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सोशल मीडिया से मदद: तीन दिन तक स्ट्रेचर पर लेटी रही तेजाब पीड़िता, रक्षा बंधन पर डॉक्टर बने मसीहा

Tue, 24 Aug 2021 03:17 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 24 Aug 2021 03:17 AM IST
सार

जानकारी के अनुसार 18 अगस्त को सुबह 11 बजे तेजाब पीड़िता महिला को सफदरजंग अस्पताल लाया गया था। मरीज के फेफड़ों में पानी भर गया था। साथ ही तत्काल किडनी उपचार की आवश्यकता भी थी लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद महिला स्ट्रेचर पर ही रही क्योंकि एक भी बिस्तर खाली नहीं था। 

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acid victim lying on a stretcher for three days in safdarjung hospital getting treatment after viral on social media
तेजाब पीड़िता - फोटो : amar ujala

विस्तार

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इलाज मिल पाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। तमाम तकनीकी और प्रयोगों के बाद भी मरीजों को सरकारी चिकित्सीय सेवाओं में सहूलियत नहीं मिल पा रही है। इसका ताजा उदाहरण दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में देखने को मिला जहां तीन दिन से तेजाब पीड़िता इलाज के लिए स्ट्रेचर पर ही लेटी रही। तीमारदार कभी दिल्ली एम्स तो कभी सफदरजंग अस्पताल के ही चक्कर लगा रहे थे लेकिन बाद में जब यह पीड़िता का दर्द सोशल मीडिया तक पहुंचा तो सफदरजंग अस्पताल के ही किडनी विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु वर्मा ने रक्षा बंधन छोड़ महिला का उपचार शुरू करवाया। 

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जानकारी के अनुसार 18 अगस्त को सुबह 11 बजे तेजाब पीड़िता महिला को सफदरजंग अस्पताल लाया गया था। मरीज के फेफड़ों में पानी भर गया था। साथ ही तत्काल किडनी उपचार की आवश्यकता भी थी लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद महिला स्ट्रेचर पर ही रही क्योंकि एक भी बिस्तर खाली नहीं था। दो दिन तक स्ट्रेचर पर रहने के बाद 21 अगस्त को जब तीमारदारों के अलावा अन्य सामाजिक संगठनों ने डॉक्टरों से बात की तो जमीन पर ही व्यवस्था कर पाने का विकल्प रखा गया जिसके चलते मरीज को बीते शनिवार और रविवार वार्ड 11 में जमीन पर ही रहना पड़ा। इस मामले को लेकर स्टॉप एसिड अटैक संगठन ने जब सोशल मीडिया पर अपील की। इस दौरान सफदरजंग अस्पताल के डॉ. हिमांशु वर्मा को इस घटना के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल मरीज का उपचार शुरू करवाया। फिलहाल महिला की हालत नाजुक बनी हुई है। 
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अस्पताल के ही एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि हालात काफी गंभीर हो चुके हैं। उनके यहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है और फिलहाल एक भी बेड खाली नहीं है। मरीजों को लगता है कि इसके पीछे डॉक्टर जिम्मेदार है जबकि सच यही है कि उनके हाथ में कुछ नहीं है। इन दिनों कोरोना के अलावा भी काफी मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं और हर मरीज को सेवाएं दे पाना संभव नहीं है। 
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वहीं एक अन्य डॉक्टर ने यहां तक कहा कि एम्स से लगातार मरीजों को रैफर कर दिया जाता है जिसके चलते सफदरजंग का बोझ अभी भी जस का तस है। एम्स में करीब 2400 बिस्तरों की क्षमता है लेकिन वहां 200 से अधिक बिस्तर प्रोटोकॉल या अन्य कारणों के चलते खाली पड़े हैं। 


जान बचाने के लिए डायलिसिस तत्काल
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार जान बचाने के लिए मरीज का डायलिसिस तत्काल करना जरूरी था लेकिन रविवार को अवकाश होने के चलते यूनिट के कर्मचारी नहीं थे। इस बात की जानकारी जब डॉ. हिमांशु वर्मा को मिली तो उन्होंने न सिर्फ स्टाफ को त्योहार छोड़ वापस अस्पताल बुलाया बल्कि महिला की तत्काल डायलिसिस शुरू किया। डॉ. वर्मा ने बताया कि उन्हें जैसे ही महिला के बारे में जानकारी मिली उन्होंने तत्काल अपने स्तर पर बेहतर प्रयास किए। सोमवार को भी डायलिसिस किया गया है। उन्होंने कहा कि अभी महिला की हालत गंभीर बनी हुई है। 

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