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दिल्ली दंगा मामला: पांच आरोपियों को मिली थी जमानत, चार पहले ही जेल से बाहर; अब पांचवा आरोपी शादाब की हुई रिहाई

Thu, 08 Jan 2026 02:03 PM IST
राहुल तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: राहुल तिवारी Updated Thu, 08 Jan 2026 02:03 PM IST
सार

2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी शादाब अहमद को अदालत से रिहाई आदेश मिला। कोर्ट ने दो लाख के जमानत बांड और जमानतदार स्वीकार किए। पुलिस सत्यापन के बाद आदेश जारी हुआ

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accused Shadab Ahmed released after court decision in Delhi riots case
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : FreePik

विस्तार

2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगे की साजिश के मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों में से एक, शादाब अहमद को गुरुवार को अदालत से रिहाई आदेश मिल गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने शादाब अहमद द्वारा प्रस्तुत किए गए दो लाख रुपये के जमानत बांड और दो स्थानीय जमानतदारों को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद यह आदेश जारी किया गया।

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यह महत्वपूर्ण कदम दिल्ली पुलिस द्वारा अदालत में आरोपी द्वारा दायर किए गए सभी जमानत बांड, जमानतदारों और दस्तावेजों की सत्यापन रिपोर्ट जमा करने के बाद उठाया गया। अदालत ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई जमानत की सभी शर्तों का पालन किया है।
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इससे एक दिन पहले, बुधवार को अदालत ने दिल्ली पुलिस को आरोपियों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और जमानतदारों का सत्यापन करने का निर्देश दिया था। वहीं, अन्य चार आरोपी भी बुधवार को जेल से रिहा हो गए थे, जब अदालत ने उनके रिहाई आदेश जारी किए थे।
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यह घटनाक्रम सोमवार को तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी, लेकिन पांच अन्य आरोपियों को जमानत देने का फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि मामले के सभी आरोपी एक ही पायदान पर नहीं हैं और उनकी भागीदारी के क्रम में अंतर है।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजरिया की पीठ ने विशेष रूप से उल्लेख किया था कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है, जो जमानत देने में एक महत्वपूर्ण कारक था।


सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पांच आरोपियों को जमानत देते समय कुल 11 शर्तें लगाई थीं। अदालत ने स्पष्ट किया था कि यदि इन शर्तों का उल्लंघन होता है, तो विचाराधीन अदालत आरोपी को सुनने के बाद जमानत रद्द करने के लिए स्वतंत्र होगी।

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