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Delhi News: पांच साल में बदली तस्वीर, प्री-स्कूल की ओर बढ़े नन्हे कदम

Fri, 23 Oct 2026 06:45 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2026 06:45 PM IST
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A transformed landscape over five years
- प्री-स्कूल जाने वाले 2 से 4 वर्ष के बच्चों का अनुपात 16.6 से बढ़कर 24.1 फीसदी हुआ
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले में पहले के मुकाबले अधिक नन्हे बच्चे औपचारिक स्कूली शिक्षा की शुरुआत से पहले ही प्री-स्कूल की दहलीज तक पहुंच रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़े जिले में शुरुआती बाल शिक्षा के प्रति बढ़ती भागीदारी दिखा रहे हैं। वर्ष 2019-21 में दो से चार वर्ष की उम्र के 16.6 फीसदी बच्चे प्री-स्कूल जाते थे, जबकि 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 24.1 फीसदी हो गया। यानी पांच साल के भीतर प्री-स्कूल जाने वाले बच्चों के अनुपात में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

प्री-स्कूल में बच्चों को खेल, गतिविधियों, बातचीत और सामूहिक सहभागिता के जरिये सीखने का अवसर मिलता है। इससे प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश से पहले बच्चों को शैक्षिक माहौल समझने में मदद मिल सकती है। ये बच्चे में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पहली कक्षा में दाखिले के लिए बच्चों की न्यूनतम आयु सीमा छह वर्ष निर्धारित की गई है। वहीं, नर्सरी में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु तीन वर्ष से अधिक होना आवश्यक है। यह नियम देश भर के सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।
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पांच साल में छोटे बच्चों की आबादी का अनुपात स्थिर
एनएफएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की आबादी का अनुपात दोनों सर्वेक्षणों में 8.3 फीसदी रहा। वर्ष 2019-21 और 2023-24 के बीच इस अनुपात में कोई बदलाव दर्ज नहीं हुआ। इसके बावजूद दो से चार वर्ष के बच्चों के प्री-स्कूल जाने का अनुपात बढ़ना शुरुआती शिक्षा में भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिल रही शुरुआती शिक्षा
छोटे बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करने में आंगनबाड़ी केंद्रों की भी अहम भूमिका है। यहां पर बच्चों को खेल, कहानी, कविता और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शुरुआती शिक्षा देने का प्रयास किया जाता है। इससे बच्चों को सीखने का माहौल मिलता है और उनमें भाषा, सामाजिक व्यवहार और बुनियादी कौशल विकसित करने में मदद मिलती है। प्री-स्कूल शिक्षा के प्रति बढ़ती भागीदारी के बीच आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्री-स्कूल जाने वाले बच्चों का अनुपात बढ़ना सकारात्मक संकेत है।
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