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Hindi News ›   Delhi ›   9th round of talks between farmers and govt concludes with no outcome next meeting on january 19

नौवें दौर की वार्ता बेनतीजा: कानूनों को रद्द करने पर अड़े किसान, सरकार देती रही संशोधन का प्रस्ताव

Fri, 15 Jan 2021 10:06 PM IST
Vikas Kumar अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली   Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 15 Jan 2021 10:06 PM IST
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9th round of talks between farmers and govt concludes with no outcome next meeting on january 19
विज्ञान भवन से बाहर निकलते किसान नेता - फोटो : अमर उजाला

सरकार के साथ किसानों की नौवें दौर की वार्ता बेनतीजा रही। किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग पर अड़े रहे तो सरकार के प्रतिनिधि कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव देते रहे। अगली बैठक 19 जनवरी को होगी। किसान संगठनों पूरी दुनिया से भारी समर्थन मिलने से किसानों का उत्साह बढ़ा है। अब यह आंदोलन जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। हम उन तमाम संगठनों और व्यक्तियों का शुक्रिया अदा करते है जिन्होंने किसी भी रूप में किसान आंदोलन का समर्थन किया है।

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संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि सरकार किसानों की मांगें सुनने की बजाय आंदोलन में शामिल लोगों को परेशान करने पर तुली हुई है। अगर कोई समाजसेवी दिल्ली के लिए बसें भेज रहा है या आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों की आर्थिक मदद कर रहा है उन्हें जांच के नाम पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से परेशान किया जा रहा है। इस तरह की मानसिक प्रताड़ना का किसान संगठन विरोध करती हैं।
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हम सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रस्तावित कमेटी के प्रस्ताव को पहले ही संगठनों ने अस्वीकार कर दिया है। सदस्य भूपिंदर मान के कमेटी से बाहर होने के फैसले का हम स्वागत करते हुए अन्य सदस्यों से भी अपील करते है कि अंतरात्मा की आवाज सुनें। इन कृषि कानूनों की असलियत को स्वीकार करते हुए अपना विरोध प्रकट करते हुए कानूनों को सिरे से रद्द करने की मांग रखें।
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मुम्बई फ़ॉर फार्मर्स के बैनर तले महाराष्ट्र के किसान संगठन अन्य प्रगतिशील संगठनों के साथ मिलकर 16 जनवरी को विशाल रैली और आम सभा का आयोजन कर रहे है। 

परेड का मकसद नुकसान पहुंचाना नहीं, फैलाई जा रही हैं भ्रांतियां
सयुंक्त किसान मोर्चा की ओर से घोषित 26 जनवरी की किसान गणतंत्र परेड के संबंध में अनेक भ्रांतियां फैल रही है। डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि संगठनों ने 
स्पष्ट कर दिया है कि किसानों की इस परेड के जरिये भारत सरकार की परेड को नुकसान पहुंचाने का कोई मकसद नहीं है। 17 जनवरी को किसान संगठनों की मीटिंग में और 18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही इस परेड की विस्तृत योजना बताई जाएगी। 

मंत्रियो के समूह की ओर से इन कानूनों को रद्द करने संबंधी फैसला सुप्रीम कोर्ट ले, इस बयान का मोर्चा विरोध करता है। लोकसभा, देशवासियों की ओर से चुने गए नेताओं का सदन हैं। ये कानून भी संसद ने बनाए हैं, इसलिए किसानों की तरफ से इन्हें रद्द करने की मांग की जा रही हैं। 
 

भड़काउ बयानों की मोर्चा ने की निंदा

सयुंक्त किसान मोर्चा ॐसिख फॉर जस्टिसॐ नाम से एक संस्था की ओर से भड़काऊ बयानों की कड़ी निंदा और विरोध करता है। हम किसानों से आग्रह करते है इस तरह के संगठनों से जागरूक रहे।

राज्यों से किसान शामिल हो रहे हैं यात्रा में, 21 को दिल्ली पहुंचेगी
दिल्ली की सीमाओं पर लगातार किसानों की संख्या बढ़ रही है। उत्तराखंड और राजस्थान में लगातार ट्रैक्टर मार्च हो रहे हैं जबकि सैकड़ों की संख्या में किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं। बिहार और मध्यप्रदेश में किसानों के पक्के मोर्चे लगे हुए है। किसान दिल्ली चलो यात्रा के तहत 15 जनवरी को ओडिशा से रवाना हुई यात्रा दिल्ली की सीमाओं पर 21 जनवरी को पहुंचेगी। किसान ज्योति यात्रा, 12 जनवरी से पुणे से शुरू हुई है जो 26 जनवरी को दिल्ली पहुंचेगी।

महिला विरोधी टिप्पणी का जवाब देने के लिए जत्था रवाना
सुप्रीम कोर्ट की महिला विरोधी टिप्पणी को जवाब देने महाराष्ट्र के जलगांव से महिलाओं का एक जत्था दिल्ली रवाना होगा। 500 से ज्यादा की संख्या में केरल से किसान शाहजहांपुर बॉर्डर पर पहुंचे है। तमिलनाडु के किसानों ने भी कृषि कानूनों की कॉपी जलाकर भारत सरकार के इस तर्क का जवाब दिया है। सिंघु बॉर्डर पर शुक्रवार को गायक रविन्दर ग्रेवाल भी पहुंचे।

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