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दिल्ली: एम्स की पॉर्किंग में 20 फीसदी जीएसटी शुल्क अतिरिक्त, दोपहिया वाहन पर 10 रुपये चॉर्ज लेने के बाद लेते हैं दो रुपये अलग से

Thu, 16 Sep 2021 02:09 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 16 Sep 2021 02:09 AM IST
सार

दिल्ली के अस्पतालों में वाहन पार्किंग को लेकर बढ़ती मनमानी की वजह से ही कोरोना महामारी से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने फ्री पार्किंग का आदेश दिया था जिसके बाद उन सभी प्राइवेट अस्पतालों को वाहन पार्किंग निशुल्क करनी पड़ी जिन्हें सरकारी भूमि पर बनाया गया था।

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20 percent gst extra in the parking of aiims after charging rs 10 on two wheeler two rupees are taken separately
एम्स पार्किंग की पर्ची - फोटो : amar ujala

विस्तार

शायद आपको यह सुनकर थोड़ा अजीब लगे लेकिन यह सच है कि दिल्ली एम्स की सेवाएं इन दिनों मरीज और तिमारदारों पर भारी पड़ रही हैं। इन्हीं में से एक वाहन पार्किंग है जिसके लिए वाहन स्वामी को 20 फीसदी तक जीएसटी देना पड़ रहा है। जबकि पार्किंग शुल्क इससे अलग लिया जा रहा है। 

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स्थिति यह है कि पार्किंग शुल्क और जीएसटी देने के बाद आपको सबूत के तौर पर पर्ची तब मिलती है जब कोई मांगता है। पर्ची पर पार्किंग शुल्क के अलावा 18 फीसदी जीएसटी लिखा हुआ है लेकिन वाहन स्वामी को 20 फीसदी शुल्क ही देना पड़ता है। स्थिति ऐसी है कि इस मनमानी के खिलाफ शिकायत केंद्र भी लोगों को पता नहीं है और न ही वहां मौजूद कर्मचारियों को किसी नियम की परवाह है। इस मामले में एम्स प्रबंधन की ओर से भी प्रतिक्रिया नहीं दी गई। 
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ऐसे समझें पार्किंग का सिस्टम
लक्ष्मी नगर निवासी विकास वर्मा ने बताया कि 13 सितंबर को जब वह एम्स की ओपीडी में पहुंचे तो वहां उन्हें बाइक पार्किंग के लिए अलग जाना पड़ा। जबकि ओपीडी में अंडरग्राउंड पार्किंग भी थी लेकिन गार्ड ने कहा कि यह सिर्फ कार के लिए है। जब वे बाइक पार्किंग में पहुंचे तो उन्हें पता चला कि पार्किंग करने के लिए 10 रुपये का शुल्क दिया जाता है। यह शुल्क चार घंटे की अवधि के लिए मान्य है। अगर चार घंटे से अधिक समय होता है तो पांच रुपये प्रति घंटे के हिसाब से देना होगा और उस पर भी अलग से जीएसटी शुल्क देना होगा। 
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दो फीसदी जीएसटी का कहीं हिसाब भी नहीं
अगर चार घंटे में ही वाहन पार्किंग से निकालते हैं तो प्रति वाहन 12 रुपये लिया जा रहा है जिसमें 10 रुपये पार्किंग शुल्क और दो रुपये (20 फीसदी) जीएसटी है जिसे पर्ची पर 18 फीसदी लिखा गया है। कर्मचारियों का हवाला देते हुए विकास ने बताया कि 20 पैसे उनके पास नहीं है इसलिए 12 रुपये ले रहे हैं लेकिन इन 20 पैसे का हिसाब किताब कहीं भी लिखित तौर पर नहीं है। वह भी तब जब एम्स में ही हर दिन एक हजार से भी अधिक दोपहिया वाहन पार्किंग में लगाए जा रहे हैं।

बहस के बाद ही मिल रही पर्ची
इसी तरह की शिकायत दरियागंज निवासी मोहम्मद जुनैद ने भी की। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें जो पर्ची दी गई उसे बाद में ले लिया और 12 रुपये मांगे, उन्होंने शुल्क दे दिया लेकिन जब पर्ची मांगी तो कर्मचारियों ने कुछ देर रुकने के लिए कहा। इस बीच बहसबाजी भी हुई और उसके बाद जाकर उन्हें पर्ची मिली। 


हाईकोर्ट ने दिया था फ्री पार्किंग का आदेश
दिल्ली के अस्पतालों में वाहन पार्किंग को लेकर बढ़ती मनमानी की वजह से ही कोरोना महामारी से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने फ्री पार्किंग का आदेश दिया था जिसके बाद उन सभी प्राइवेट अस्पतालों को वाहन पार्किंग निशुल्क करनी पड़ी जिन्हें सरकारी भूमि पर बनाया गया था। हालांकि यह समस्या सरकारी अस्पतालों में काफी जटिल हो चुकी है। 

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