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खुशखबर: फिलीपींस से दिल्ली आए 11 बच्चों को मिला नया जीवन, अपोलो में लिवर प्रत्यारोपण के बाद घर वापस लौटे
Thu, 26 Aug 2021 09:13 AM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Thu, 26 Aug 2021 09:13 AM IST
सार
डॉक्टरों के अनुसार इन बच्चों की उम्र 12 महीने से 15 साल के बीच है और सभी गंभीर रूप से बीमार थे। इन्हें जल्द से जल्द प्रत्यारोपण की आवश्यकता थी, लेकिन कोविड की वजह से दूसरे मरीजों के इलाज पर काफी असर पड़ रहा था।
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फीलीपींन्स लौटे बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों के शिकार फिलीपींस से दिल्ली आए 11 बच्चों को नया जीवन मिला है। अपोलो अस्पताल में इनका लिवर प्रत्यारोपण हुआ है। बुधवार को सभी बच्चे और उनके माता-पिता अपने घर वापस चले गए।
डॉक्टरों के अनुसार इन बच्चों की उम्र 12 महीने से 15 साल के बीच है और सभी गंभीर रूप से बीमार थे। इन्हें जल्द से जल्द प्रत्यारोपण की आवश्यकता थी, लेकिन कोविड की वजह से दूसरे मरीजों के इलाज पर काफी असर पड़ रहा था। अस्पताल की एक टीम ने इन सभी परिवारों को यात्रा की अनुमति लेने में मदद की। जिसके बाद उन्हें चार्टर्ड प्लेन के जरिये दिल्ली लाया गया और इलाज के बाद सुरक्षित उनके देश भेजा गया।
डॉ. अनुपम सिब्बल ने बताया कि पहले बच्चों को पूर्ण अवधि के लिए क्वारंटीन किया गया और इसके बाद जीवनरक्षक सर्जरी सफल रही। ये मरीज काफी समय से अस्पताल में थे। चूंकि प्रत्यारोपण की प्रक्रिया लंबी और ऑपरेशन के बाद भी विशेष निगरानी की आवश्यकता होती है।
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दूसरी लहर में चार बच्चे हुए संक्रमित
डॉक्टरों के अनुसार दूसरी लहर के दौरान चार बच्चे संक्रमित हो गए थे। हालांकि समय पर इलाज की वजह से उनका जीवन बचा लिया गया। इन बच्चों को दो-दो बार नया जीवन मिल पाया, क्योंकि दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों की चुनौतियां किसी से छिपी नहीं है।
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डॉक्टरों के अनुसार इन बच्चों की उम्र 12 महीने से 15 साल के बीच है और सभी गंभीर रूप से बीमार थे। इन्हें जल्द से जल्द प्रत्यारोपण की आवश्यकता थी, लेकिन कोविड की वजह से दूसरे मरीजों के इलाज पर काफी असर पड़ रहा था। अस्पताल की एक टीम ने इन सभी परिवारों को यात्रा की अनुमति लेने में मदद की। जिसके बाद उन्हें चार्टर्ड प्लेन के जरिये दिल्ली लाया गया और इलाज के बाद सुरक्षित उनके देश भेजा गया।
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डॉ. अनुपम सिब्बल ने बताया कि पहले बच्चों को पूर्ण अवधि के लिए क्वारंटीन किया गया और इसके बाद जीवनरक्षक सर्जरी सफल रही। ये मरीज काफी समय से अस्पताल में थे। चूंकि प्रत्यारोपण की प्रक्रिया लंबी और ऑपरेशन के बाद भी विशेष निगरानी की आवश्यकता होती है।
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दूसरी लहर में चार बच्चे हुए संक्रमित
डॉक्टरों के अनुसार दूसरी लहर के दौरान चार बच्चे संक्रमित हो गए थे। हालांकि समय पर इलाज की वजह से उनका जीवन बचा लिया गया। इन बच्चों को दो-दो बार नया जीवन मिल पाया, क्योंकि दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों की चुनौतियां किसी से छिपी नहीं है।