Delhi: जमीन घोटाले में एबीडब्ल्यू की फरार निदेशक सोना बंसल मुंबई से गिरफ्तार, 23 मामलों में थी तलाश
फरार सोना बंसल (60) को पुलिस ने मुंबई के एक अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया है। दिल्ली और हरियाणा कोर्ट ने सोना व पति अतुल बंसल को भगोड़ा घोषित किया हुआ था। दिल्ली पुलिस ने दोनों की गिरफ्तारी पर 50-50 हजार का इनाम भी घोषित किया हुआ था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गुरुग्राम-मानेसर में 1600 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में फरार एबीडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की निदेशक को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया है। 23 बेहद हाईप्रोफाइल केस में कई साल से फरार सोना बंसल (60) को पुलिस ने मुंबई के एक अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया है। दिल्ली और हरियाणा कोर्ट ने सोना व पति अतुल बंसल को भगोड़ा घोषित किया हुआ था। दिल्ली पुलिस ने दोनों की गिरफ्तारी पर 50-50 हजार का इनाम भी घोषित किया हुआ था। गिरफ्तारी के बाद सोना ने दावा किया है कि अतुल की हाल में मौत हो गई है, लेकिन वह पति की मौत का कोई प्रमाण नहीं दे पाई। दंपती पहचान छिपाकर रह रहे थे।
अपराध शाखा के विशेष आयुक्त रविंद्र सिंह यादव ने बताया कि काफी समय से दंपती की तलाश की जा रही थी। आरोपी लगातार देशभर में ठिकाने बदल रहे थे। इस दौरान इंस्पेक्टर अरुण सिंधु, केके शर्मा की टीम को खबर मिली कि दंपती मुंबई में मौजूद है। फौरन एसआई राहुल गर्ग, एएसआई रविंदर व अन्य टीम को मुंबई भेजा गया। पुलिस ने छापे के बाद हाईप्रोफाइल सोसाइटी के एक फ्लैट से सोना को दबोच लिया। सोना मुंबई में स्लोचना गुप्ता और पति अरुण गुप्ता बनकर रह रहे थे। दंपती ने फर्जी नाम के पहचान पत्र भी बनवा लिए थे। पुलिस सोना को लेकर दिल्ली आ गई। दंपती के खिलाफ ईओडब्ल्यू में 10 और सीबीआई, ईडी व साकेत थाने के अलावा हरियाणा में 23 मामले दर्ज हैं।
ऐसे किया घोटाला
दंपती व अन्य ने आदित्य बिल्ड वेल (एबीडब्ल्यू) इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी बनाकर गुरुग्राम-मानेसर इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप के नाम से परियोजना की शुरुआत की थी। आरोपियों ने हरियाणा सरकार के कुछ अज्ञात अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों व अन्य से 400 एकड़ भूमि खरीद ली। उस समय जमीन की कीमत 1600 करोड़ से अधिक की आंकी गई, लेकिन जमीन जाने का डर दिखाकर महज 100 करोड़ में भूमि खरीदी गई। बाद में जमीन को अच्छे दामों में बेच दिया गया।
इसका खुलासा होने पर मानेसर पुलिस थाने में घोटाले का मामला दर्ज हुआ। बाद में इसकी जांच एसीबी और सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने वर्ष 2015 में मामला दर्ज किया। पंचकुला कोर्ट ने मामले में आरोपियों को भगोड़ा घोषित कर दिया। आरोपियों ने शुरू किए किसी भी प्रोजेक्ट को पूरा नहीं किया। इसे लेकर दिल्ली के ईओडब्ल्यू में कई मामले दर्ज हुए। साकेत कोर्ट ने दोनों को भगोड़ा घोषित किया। इसके बाद साकेत थाने में मामला भी दर्ज किया गया। बाद में ईडी ने भी मामले की जांच शुरू की। तब से दंपती साथियों के साथ फरार चल रहे थे।