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बिना खर्च वाड्रा ने 6 माह में कमाए 40 करोड़, आईएएस खेमका ने पहले उठाए थे सवाल

Sun, 02 Sep 2018 05:41 AM IST
शाहनवाज आलम, अमर उजाला, गुरुग्राम
शाहनवाज आलम, अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Sun, 02 Sep 2018 05:41 AM IST
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IAS ashok khemka asked to robert Vadra who to earn 40 crore in 6 month
आईएएस अशोक खेमका और रॉबर्ट वाड्रा
शिकोहपुर गांव की जमीन के घोटाले को लेकर सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद भूमि सौदा एक बार फिर कांग्रेस पार्टी और उसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए परेशानी का सबब बनता दिख रहा है। 
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मनमोहन सिंह के शासनकाल में हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने वाड्रा द्वारा गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में जमीन खरीदने और कुछ समय बाद ही उसे करोड़ों रुपये के मुनाफे पर बेचने की घटना पर विस्तृत रिपोर्ट देकर नेहरू-गांधी परिवार की प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया था। खेमका की रिपोर्ट से वाड्रा ही नहीं हरियाणा सरकार द्वारा किए जमीन घोटालों का भी पता चला था। 
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खेमका ने अपनी सौ पेज की रिपोर्ट में वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटलिटी द्वारा 3.53 एकड़ जमीन खरीद सौदे को तार-तार कर दिया था। खेमका ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि जब वाड्रा ने 8 फरवरी, 2008 में जमीन खरीदने का सौदा किया तब उसकी कंपनी की पेडअप कैपिटल मात्र एक लाख रुपये थी।
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ढींगरा आयोग की जांच रिपोर्ट अब भी सार्वजनिक नहीं हुई

वाड्रा ने कॉरपोरेशन बैंक का जाली चेक लगाकर जमीन की रजिस्ट्री करा ली। जमीन का मूल्य 7.5 करोड़ रुपये दिखाया और रजिस्ट्री पर खर्चा आया 45 लाख रुपये। जमीन खरीदने के 18 दिन के भीतर हरियाणा सरकार के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने लैंड यूज बदलकर इस जमीन पर कॉलोनी बनाने का लाइसेंस जारी कर दिया। खरीदने के छह महीने बाद वाड्रा ने अपनी जमीन 58 करोड़ रुपये में डीएलएफ को बेच दी।

डीएलएफ से, जो अग्रिम पैसा मिला वाड्रा ने उसी से जमीन का मूल्य चुकाया। मतलब यह है कि बिना एक भी धेला खर्च किए सोनिया गांधी के दामाद ने सिर्फ छह महीने में 40 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा लिए। मामले की निष्पक्ष जांच कराने की बजाय तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वाड्रा का बचाव किया था। तब इस मुद्दे पर संसद की कार्यवाही भी ठप हुई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

गुरुग्राम में कथित जमीन घोटाले के मामले में भाजपा सरकार ने न्यायाधीश एसएन ढींगरा की अध्यक्षता में ढींगरा आयोग का गठन किया था। इस आयोग ने ही शिकोहपुर जमीन घोटाले की जांच की थी। आयोग ने 182 पेज की रिपोर्ट हरियाणा सरकार को सौंप दी है, लेकिन अब तक यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। 
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