{"_id":"6009774c8ebc3e2c4f6db61a","slug":"ghaziabad1611233100","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीमा के बाद पूर्व सैनिक निभा रहे समाजिक जिम्मेदारी","category":{"title":"Local","title_hn":"लोकल","slug":"local"}}
सीमा के बाद पूर्व सैनिक निभा रहे समाजिक जिम्मेदारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फ़ोटो सहित
विज्ञापन
सीमा के बाद पूर्व सैनिक निभा रहे समाजिक जिम्मेदारी
- सेवानिवृत्त के बाद शहर में चला रहे अलग-अलग सेवा प्रकल्प
संवाद न्यूज़ एजेंसी
गाजियाबाद। सरहद पर रहकर देश सेवा करने के बाद अब सेवानिवृत्त होकर पूर्व सैनिक उतनी ही मुस्तैदी से सामाजिक सरोकारों को लेकर भी सक्रिय हैं। वैसे तो हर सैनिक गौरव सेनानी होता है और देश में कोई संकट खड़ा हो जाए तो अपने फर्ज से कभी पीछे नहीं हटते। देशभर में पूर्व सैनिकों की कई संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण आदि अलग-अलग विषयों को लेकर सेवा प्रकल्प चला रहे हैं। विभिन्न मुद्दों को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। यहां आपको रूबरू करा रहे हैं, शहर के कुछ ऐसे ही पूर्व सनिकों से जो सेवानिवृत्त के सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय हैं।
1. राजनगर एक्सटेंशन की वीवीआइपी सोसायटी में रहने वाले राजेंद्र प्रसाद त्यागी वायु सेना से सेवानिवृत्त हैं। सेवानिवृत्ति के समय कमांडिंग ऑफिसर ने उनसे आगे समाज को लेकर कुछ करने के सलाह दी थी। इसको उन्होंने भी गम्भीरता से लिया और एक्सटेंशन में ही झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। जो स्कूल नहीं जाते थे। अपने साथ सोसायटी के ही कुछ सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी जोड़ा। स्कूल का माहौल बनाने के लिए सभी बच्चों की अपने पैसे से ड्रेस भी बनवाई। एक फैक्टरी परिसर में चलने वाला यह केंद्र फिलहाल कोरोना के चलते हैं। स्कूल खुलने का आदेश होते ही वह भी शुरू करेंगे।
2. वीर चक्र विजेता कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी शहर की एक प्रसिद्ध सामाजिक शख्सियत है। उन्होंने बताया कि 20 साल पहले जब वह सेना से रिटायर हुए तो कर्नल रैंक और एमटेक शिक्षित होने के नाते उनके सामने कई यूनिवर्सिटी और दूसरी कॉरपोरेट कंपनियों से नौकरी के अवसर थे लेकिन उन्होंने सामाज और सेवा के क्षेत्र को चुना। 15 साल से वह एओए और आरडब्ल्यूए के माध्यम से लगातार लोगों की समस्या उठा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय सैनिक संस्था बनाई। जो 1947 के बाद देश में शहीद हर सैनिक को सम्मानित करने का काम कर रही हैं। इस संगठन का देश भर में काम चल रहा है।
विज्ञापन
(कर्नल टीपी त्यागी)
3. राष्ट्रीय सैनिक संस्था से जुड़े राजेंद्र बगासी गढ़वाल रेजिमेंट से सेवानिवृत हैं। सामाजिक कार्यों की ओर रुझान के चलते वह
राष्ट्रीय सैनिक संस्था से जुड़े और शुरुआती सदस्य तौर से अब तक जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सैनिक संस्था पूर्व कुछ निश्चित उद्देश्यों को लेकर काम कर रही हैं। जो जरूरत पड़ने पर तमाम दूसरी संस्थाओं के साथ मिलकर राहत और सेवा कार्य भी करती हैं। कोरोनाकाल में भी उन्होंने लोगों की मदद की। उन्होंने बताया कि पूर्व सैनिक कई प्रकार से दक्ष होता है। जिसका लाभ समाज को मिलना चाहिए।
(राजेन्द्र बगासी)
4. 1971 के युद्ध में शामिल रहे कमांडर हरिशंकर शर्मा नौसेना से सेवानिवृत्त हैं। वर्तमान में वह एक विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर भी हैं। वसुंधरा सेक्टर-3 निवासी 75 वर्षीय हरिशंकर शर्मा कई एनजीओ के साथ जुड़े हुए हैं। वह सेवानिवृति के बाद लगातार शिक्षा व योग के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी नज़र में देश और समाज की सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्ता व नैतिक मूल्यों से युक्त शिक्षा है। इन सब विषयों को लेकर वह 60 पुस्तकें लिख चुके हैं। जिनके माध्यम से सक्षम लोगों को जागरूक किया जा सके। पिछले कुछ समय से ऑनलाइन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को योग के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन