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सात साल पहले हुए संक्रमित, अब लोगों को कर रहे जागरूक
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एक दिसंबर एड्स दिवस
सात साल पहले हुए संक्रमित, अब लोगों को कर रहे जागरूक
- संक्रमण की चपेट में आने पर लगा था खत्म हो गई थी दुनिया
आशुतोष यादव
गाजियाबाद। सात साल पहले कई दिन तक बुखार होने पर इलाज के बाद भी आराम नहीं मिला तो डाक्टर ने एचआईवी जांच कराने की सलाह दी। जांच कराने के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जैसे ही पता चला कि रिपोर्ट पॉजिटिव आई है तो एक बार लगा कि पूरा जीवन समाप्त हो गया। लगातार स्वास्थ्य गिरता चला गया। समझ में भी नहीं आ रहा था कि संक्रमण की चपेट में कैसे आ गए। इसका पता आज तक नहीं चल पाया। संक्रमण की जानकारी मिलने के तीन महीने तक लगातार शरीर सूखता जा रहा था। तीसरे महीने एक दिन परिजनों के साथ दवाई लेने के लिए जिला एमएमजी अस्पताल में गया। वहां पर एचआइवी संक्रमित एक व्यक्ति दवा ले रहे थे। उन्होंने बताया कि वह पिछले पांच साल से संक्रमित हैं, नियमित दवाई लेने से कोई परेशानी नहीं है। इसके बाद से जैसे मेरे शरीर में स्वतः ऊर्जा का संचार हुआ और घर आने के बाद निश्चय कि जब तक जीवन है दूसरों को जागरूक करुंगा। छह साल से अब तक लोगों को जागरूक कर रहा हूं।
यह आप बीती बताई गोविंदपुरम निवासी एक एचआईवी संक्रमित साफ्टवेयर इंजीनियर ने। वह नोएडा के एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बेटी है। सभी संक्रमण मुक्त हैं।
लोगों को करते हैं जागरूक
इंजीनियर ने बताया कि कंपनी में शिफ्ट वाइज काम चलता है। जब सुबह के समय शिफ्ट होती है, तब कुछ चिंहित क्षेत्र हैं जहां पर एनजीओ के साथ मिलकर बिना किसी पारिश्रमिक के लोगों को जागरूक करते हैं। उन्होंने बताया कि नया बस अड्डा, हापुड़ चुंगी, लोनी, भौपुरा बार्डर, विजय नगर के कुछ क्षेत्र एवं विजय नगर बाईपास, राजनगर एक्सटेंशन चौराहा सहित अन्य क्षेत्रों में जागरूक करने के साथ ही लोगों को उपचार एवं जांच कराने में भी मदद करते हैं।
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महिला अस्पताल में दो बच्चे पैदा हुए संक्रमण मुक्त
बेहतर इलाज से महिला अस्पताल में अक्टूबर 2019 व जनवरी 2020 में दो संक्रमित महिलाओं के प्रसव कराए गए। दोनों के बच्चे संक्रमण मुक्त पैदा हुए।
महिला अस्पताल की पूर्व सीएमएस वर्तमान में अपर निदेशक परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य सेवाएं लखनऊ डा. दीपा त्यागी ने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में विजय नगर क्षेत्र की एक महिला प्रसव के लिए आई थी। हालांकि उसके इलाज के दौरान ही पता चल गया था कि वह एचआईवी पॉजिटिव है। इसलिए प्रसव के लिए आने पर कोई विशेष परेशानी नहीं हुई। सामान्य प्रसव के बाद बेटी पैदा हुई। जांच के बाद बच्ची संक्रमण मुक्त पाई गई।
लोनी की महिला का सिजेरियन प्रसव के बाद बेटा स्वस्थ्य
जिला महिला अस्पताल में जनवरी में लोनी क्षेत्र से एक महिला प्रसव के लिए लाई गई थी। जांच रिपोर्ट में वह एचआईवी पॉजिटिव थी। पूर्व सीएमएस डा. दीपा त्यागी ने बताया कि रिपोर्ट पॉजिटिव होने के कारण एक बार स्टाफ ने प्रसव कराने से इंकार करते हुए रेफर कर दिया। मामला मेरे संज्ञान में आया तो महिला का सिजेरियन प्रसव कराया। बच्चा स्वस्थ होने के साथ ही संक्रमण मुक्त था।
डा. दीपा ने बताया कि जो संक्रमित होती हैं, उनके गर्भधारण के समय पहले ही महीने से इलाज शुरू कर दिया जाता है। प्रसव के बाद बच्चे का प्रोफाइलेक्टिक दवाई पिलाई जाती है। उसके बाद पीरियाडिक्ली टेस्ट किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि सीएमएस रहने के दौरान वर्ष में आठ से दस प्रसव कराती थीं। सभी बच्चे संक्रमण मुक्त हुए हैं।
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आशुतोष यादव
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