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पटाखों का शोर कर देता है कान को कमजोर

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 12 Nov 2020 05:06 PM IST
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पटाखों का शोर कर देता है कान को कमजोर
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- 100 डेसीबल से अधिक होती है अधिकांश पटाखों की आवाज माई सिटी रिपोर्टर  गाजियाबाद। दीपों का त्योहार माना जाने वाला दीपावली पर्व पर पटाखों का शोर न सिर्फ लोगों को बेचैन कर देता है बल्कि तेज आवाज लोगों को आजीवन बहरा भी बना देती है। हर साल आतिशबाजी के शोर में कई लोग अपने सुनने की क्षमता खो देते हैं। इस बार दीपावली मनाते समय ध्यान रखें, कहीं ऐसा न हो कि पटाखों की तेज शोर, आपके कानों के सुनने की क्षमता को कमजोर न कर दें। डाक्टरों का कहना है कि इंसान के सुनने की क्षमता 85 डेसीबल होती है, लेकिन अधिकांश पटाखों की आवाज एक सौ डेसिबल से अधिक होती है।  कई पटाखों से निकलती है तेज आवाज जब दो लोग आपस में बात करते हैं तो उस समय आवाज का स्तर 40 से 60 डेसिबल के बीच होता है। जब ध्वनि का स्तर 90 डेसिबल तक पहुंच जाता है, तो वह आवाज कानों को कष्ट देने लगती है और कान के सुनने की क्षमता को प्रभावित करती है। कुछ पटाखों में 160 डेसिबल आवाज का स्तर होता है, जो लोगों के कानों के लिए असहनीय होता है।
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लोग हो सकते हैं बहरे 160 डेसिबल स्तर की आवाज अगर 0.003 सेकेंड तक कोई भी व्यक्ति सुन ले, तो उसके सुनने की क्षमता कम हो सकती है। कई मामलों में व्यक्ति पूरी तरह बहरा भी हो सकता है। छोटे बच्चों के तो सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ-साथ कानों के पर्दे भी फट सकते हैं।
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होता है ध्वनि प्रदूषण कई पटाखों में से बहुत तेज ध्वनि निकलती है, जिससे ध्वनि प्रदूषण फैलता है। कई पटाखा बम ऐसे भी होते हैं, जिनमें विशेष तौर पर तेज आवाज करने के लिए अत्याधिक मात्रा में बारूद भरा जाता है, जिससे पटाखा फूटने पर असहनीय आवाज होती है। इससे दिल व दिमाग पर भी असर पड़ता है।  
 तेज आवाज से यह होती है परेशानी  -सिर दर्द-चक्कर आना -कान में गूंजने की आवाज सुनाई देते रहना -कान का पर्दा फटना -कान सुन्न पड़ जाना -पूरी तरह बहरा हो जाना। बचाव - दीपावली के दिन घर से बाहर निकलते समय कान में हल्की रुई डालकर निकलें। - बच्चों और लोगों को प्रेरित करें कि पटाखे न फोड़ें - पटाखे जलाते समय तुरंत दूर हो जाएं। - पटाखों वाले हाथों से कान को न छुएं। - कानों में दिक्कत होने पर उन्हें कुछ देर की लिए बंद कर लें। ------ कान पर तेज ध्वनि का काफी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे कई लोगों के सुनने की क्षमता कम हो जाती है या फिर व्यक्ति बहरा भी हो सकता है। अगर पटाखे जलाते समय कोई अप्रिय घटना हो जाती है, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
डा. नवनीत वर्मा, ईएनटी सर्जन एवं आईएमए मीडिया प्रभारी  --- कोई भी व्यक्ति जिसे पहले से ही कम सुनाई देता हो, उसे पटाखों से दूर रहना चाहिए। तेज ध्वनि से कई लोगों की सुनने की क्षमता प्रभावित होती है इसलिए पटाखों की आवाज द्वारा कान में कोई भी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर जांच करवानी चाहिए। -डॉ. बीपी त्यागी, वरिष्ठ नाक कान गला रोग विशेषज्ञ   --------------- कितने डेसीबल की आवाज को कितनी देर झेल सकता है कान  डेसीबल  - समय  85 - 8 घंटा 90 - 4 घंटा 95 - 2 घंटा 100 - 1 घंटा 105 - 30 मिनट  110 - 15 मिनट  115 - 7.15 मिनट  120 - 3.5 मिनट 125 - 1.5 मिनट  125 से अधिक - 00 मिनट  --------------- आशुतोष यादव 
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