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बीमा के दस्तावेज बता कराए हस्ताक्षर, पिता-पुत्र के नाम निकाला 4 करोड़ का लोन

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2020 06:01 PM IST
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- नगर कोतवाली पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर लक्ष्य तंवर, उसकी पत्नी व बैंक अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किया केस
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- आरोपी लक्ष्य तंवर ने 3 लाख रुपये उधार देकर पीडि़त पिता-पुत्र को झांसे में लिया, इसके बाद किया फर्जीवाड़ा माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। करोड़ों रुपये के लोन फर्जीवाड़े में फंसे कविनगर ई-ब्लॉक निवासी लक्ष्य तंवर के खिलाफ एक और मामला कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ है। तुराब नगर निवासी शिवम कुमार का आरोप है लक्ष्य तंवर ने बहन की शादी में 3 लाख रुपये उधार देकर उन्हें झांसे में लिया। इसके बाद एक करोड़ के बीमे के दस्तावेज बताकर उनके व उनके पिता से लोन के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए। बैंक से चार करोड़ जमा कराने का नोटिस प्राप्त होने पर उन्हें फर्जीवाड़े का पता चला। शिवम के मुताबिक पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने पर उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट के आदेश पर नगर कोतवाली पुलिस ने लक्ष्य तंवर, उसकी पत्नी व बैंक अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।.................... दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक शिवम कुमार का कहना है कि उनके पिता सुनील कुमार और कविनगर ई-ब्लॉक निवासी लक्ष्य तंवर के पिता अशोक कुमार रिश्ते में चचेरे भाई हैं। शिवम के मुताबिक वह कपड़ों की दुकान पर नौकरी करते हैं। उनके पिता कपड़ों पर प्रेस तथा मां घरों में चौका-बर्तन करती है। कुछ वर्ष पहले लक्ष्य तंवर अखबार बांटने का काम करता था, इसी दौरान उसकी एक बैंक मैनेजर से दोस्ती हो गई। इसके बाद लक्ष्य तंवर ने बैंक से लोन दिलाने का काम भी शुरू कर दिया। शिवम का कहना है कि वर्ष 2015 में उसकी बहन शादी के लायक हो गई। शादी के लिए उनके पिता ने लक्ष्य तंवर से लोन दिलाने के संबंध में बात की। इस पर लक्ष्य तंवर ने कहा कि वह उन्हें अपने पास से तीन लाख रुपये उधार दे दिए। कुछ दिनों बाद लक्ष्य तंवर ने एक प्रॉपर्टी उनके नाम तथा दूसरी प्रॉपर्टी उनके पिता के नाम कराने की बात कही। लक्ष्य तंवर ने पीएनबी की चंदननगर रामप्रस्थ शाखा में उनका एक करोड़ रुपये का बीमा कराने की भी बात कही। कुछ दिनों बाद उन्हें व उनके पिता को बैंक ले जाकर डिप्टी मैनेजर प्रियदर्शनी से मिलवाया।
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दो मकान कराए नाम, सात माह बाद बैंक से आ गया 4 करोड़ का नोटिस................ शिवम का आरोप है कि डिप्टी मैनेजर ने उसके व उसके पिता के कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए। सितंबर 2018 में उन्हें एक करोड़ रुपये की पॉलिसी प्राप्त हो गई। इसके बाद वह लक्ष्य तंवर के और भी मुरीद हो गए। अक्टूबर 2018 में लक्ष्य तंवर ने दो मकानों की रजिस्ट्री उनके व उनके पिता के नाम करा दी। आरोप है कि मई 2019 में पीएनबी की उक्त शाखा से उन्हें व उनके पिता को दो-दो करोड़ रुपये जमा करने का नोटिस मिला। नोटिस के बारे में पूछने पर लक्ष्य तंवर ने बैंक द्वारा गलती से नोटिस जारी होने की बात कही। बाद में पता चला कि जो प्रॉपर्टी उनके नाम कराई गई थी, उस पर पीएनबी द्वारा दो-दो करोड़ रुपये का लोन निकाला गया है। इसके बाद उन्होंने उक्त प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री निकाली तो उसकी पावर ऑफ अटॉनी 31 जुलाई 2018 को लक्ष्य तंवर व उसकी पत्नी के नाम कर दी गई थी।
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1.33 करोड़ की संपत्ति पर चार करोड़ का लोन.................... शिवम का कहना है कि दोनो प्रॉपर्टी की कीमत एक करोड़ 33 लाख रुपये के आस-पास थी, लेकिन बैंक अधिकारियों व लक्ष्य तंवर ने साठगांठ कर उन पर चार करोड़ का लोन निकाल लिया। उन्होंने पुलिस में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके चलते उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। नगर कोतवाल संदीप सिंह का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर लक्ष्य तंवर, पीएनबी की चंदननगर रामप्रस्थ शाखा की तत्कालीन डिप्टी मैनेजर प्रियदर्शनी, ब्रांच मैनेजर उत्कर्ष कुमार, लक्ष्य तंवर, उसकी पत्नी प्रियंका तंवर व अन्य बैंककर्मियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।
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