{"_id":"5f7db5fb8ebc3e9ba205276f","slug":"ghaziabad1602074107","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदूषण का बढ़ता ग्राफ, फिर रुक सकते हैं विकास कार्यों के पहिए","category":{"title":"Local","title_hn":"लोकल","slug":"local"}}
प्रदूषण का बढ़ता ग्राफ, फिर रुक सकते हैं विकास कार्यों के पहिए
विज्ञापन
दिल्ली-मेरठ हाईवे पर रैपिड रेल कॉरिडोर का चलता हुआ काम
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सबहेडः पिछले साल के मुकाबले महानगर में प्रदूषण का ग्राफ दोगुना, अक्टूबर के पहले सप्ताह में बीते साल के मुकाबले एयर क्वालिटी इंडेक्स डबल
विज्ञापन
- दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे, रैपिड रेल कॉरिडोर सहित जीडीए के आधा दर्जन और निजी बिल्डरों के 80 प्रोजेक्टों में काम है जारी
- बुधवार को 310 पहुंचा एक्यूआई, ग्रेप के नियम कड़ाई से लागू होना जरूरी
प्रद्युम्न उपाध्याय
गाजियाबाद। अक्टूबर माह में एनसीआर सहित गाजियाबाद में प्रदूषण का बढ़ता ग्राफ तनाव बढ़ा रहा है। पिछले साल के मुकाबले अक्टूबर के पहले सप्ताह में महानगर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खतरे के निशान से ऊपर चल रहा है। प्रदूषण का बढ़ता स्तर इस बार फिर से विकास के पहिए रोक सकता है। बुधवार को महानगर का एक्यूआई बढ़कर 310 पर पहुंच गया। ऐसे में दिवाली से पहले अक्टूबर माह में ही वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) को कड़ाई से लागू करने की जरूरत है।
-------------
प्रदूषण बढ़ा तो रैपिड, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे सहित 100 प्रोजेक्टों पर पड़ेगा असर
महानगर में वर्तमान में रैपिड रेल कॉरिडोर और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के बड़े प्रोजेक्टों पर तेज गति से काम जारी है। इसके अलावा जीडीए के हिंडन नया पुल, प्रधानमंत्री आवास सहित करीब आधा दर्जन प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। अगर निजी बिल्डरों के प्रोजेक्ट पर बात करें तो महानगर में करीब 80 छोटे-बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। अगर प्रदूषण का लेवल और बढ़ता है तो बीते साल की तरह निर्माण कार्यों पर फिर से रोक लग सकती है। जिससे पहले से ही देरी से चल रहे प्रोजेक्टों के आगे खिसकने की संभावना खड़ी हो जाएगी।
--------------
सरकारी मशीनरी को कड़ाई से लागू करने होंगे नियम
जीडीए नगर निगम सहित पूरी सरकारी मशीनरी को प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के लिए ग्रेप के साथ एनजीटी के निर्देशों को कड़ाई से लागू करना होगा। इसमें धूल उड़ने से रोकने के लिए टैंकों के जरिए पानी का छिड़काव बेहद जरूरी है। वहीं मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन सड़कों की सफाई, रात में सड़कों की धुलाई, कंस्ट्रक्शन साइट पर निर्माण सामग्री को ढककर रखने, प्रतिबंधित ईंधन के प्रयोग पर रोक, बड़े जेनरेटर का मानकों के तहत संचालन, पीएनजी-सीएनजी का इस्तेमाल सहित कई अन्य नियम शामिल है।
विज्ञापन
--------------
एनएच-9 और दिल्ली-मेरठ हाईवे पर धूल अधिक, लोनी सबसे ज्यादा प्रदूषित
बड़े निर्माण कार्यों के चलते महानगर में सबसे एनएच-9, दिल्ली-मेरठ हाईवे पर सबसे ज्यादा धूल उड़ती है। दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे के काम के चलते लालकुआं से यूपी गेट के बीच दिनभर धूल का गुबार देखा जा सकता है। वहीं प्रदूषण के मामले में महानगर का लोनी क्षेत्र सबसे आगे है। बुधवार को लोनी क्षेत्र का एक्यूआई 310 पर पहुंच गया। ऐसे में इन क्षेत्रों में प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।
--------------------
जीडीए क्षेत्रों और निर्माण साइटों पर इसी सप्ताह शुरू होगा काम
जीडीए की विभिन्न कॉलोनियों में टैंकरों से नियमित पानी के छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं। वहीं प्राधिकरण के साथ निजी बिल्डरों की निर्माण साइटों पर बालू, गिट्टी सहित अन्य सामग्री को ढक कर रखने के नियम को कड़ाई से लागू कराया जाएगा। सभी प्रवर्तन अनुभाग के प्रभारियों को इस बाबत निर्देश दिए गए हैं। जीडीए की कॉलोनियों वह निर्माण साइटों पर पानी के छिड़काव के लिए अतिरिक्त टैंकर लगाए जाएंगे। - संतोष कुमार राय, सचिव, जीडीए
-----------------
बीते साल व वर्तमान में अक्टूबर के पहले सप्ताह में महानगर का एयर क्वालिटी इंडेक्सः
2019 2020
एक अक्टूबर 119 202
दो अक्टूबर 117 243
तीन अक्टूबर 163 230
चार अक्टूबर 114 253
पांच अक्टूबर 130 220
छह अक्टूबर 157 229
सात अक्टूबर 173 310
(नोटः आंकड़े नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के आधार पर हैं )
--------------
विज्ञापन
विज्ञापन