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32 साल बाद पाकिस्तानी से भारतीय हुई फाखरा नौरीन

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 26 Sep 2020 11:50 PM IST
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बुलंदशहर। 32 साल पूर्व निकाह के बाद भारत आईं पाकिस्तान की झेलम जनपद निवासी फाखरा नौरीन को आखिकार भारत की नागरिकता मिल ही गई। फाखरा काफी वर्षों से भारत में लांग टर्म वीजा पर रह रही हैं। एलआईयू अफसरों से शनिवार को जानकारी मिलने के बाद एसएसपी ने फाखरा नौरीन को भारतीयता का सर्टिफिकेट सौंपा है।
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जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के जिला झेलम की कालोनी गुलजारी कालोनी निवासी फाखरा नौरीन पुत्री आफताब आलम की शादी वर्ष 1988 में बुलंदशहर के मामन चौकी निवासी नसीम के साथ हुई थी। शादी के दौरान फाखरा लांग टर्म वीजा पर भारत आई थीं। फाखरा नौरीन ने बताया कि उसने भारतीय नागरिकता के लिए शादी के बाद ही आवेदन किया था, लेकिन हर बार उसका लांग टर्म वीजा की ही अवधि बढ़ा दी जाती थी। भारत की नागरिकता लेने की प्रक्रिया लगातार चल रही थी, लेकिन मान्यता नहीं हो रही थी। शुक्रवार का दिन फाखरा के लिए खुशी लेकर आया। लखनऊ से एक सर्टिफिकेट एलआईयू ऑफिस में पहुंचा। जिसमें बताया गया कि फाखरा को भारत की मान्यता दे दी गई है। शनिवार सुबह एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने फाखरा को कार्यालय में बुलाकर उसे भारतीय नागरिकता का सर्टिफिकेट दिया। बता दें कि वर्तमान में फाखरा दादी बन गयी है। उनकी उम्र करीब ५५ साल है। भारत की नागरिकता मिलने के बाद फाखरा एसएसपी दफ्तर में काफी खुश दिखाई दी।
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फाइल गुम हुई, फिर निकलवाई फाखरा ने बताया कि 19 दिसंबर 1988 को शादी के बाद वह यहां आई थीं। यहां आते ही भारतीय नागरिकता के लिए कोशिश की थी। लेकिन उनकी फाइल गुम हो गई, इसके बाद वो फिर से पाकिस्तान गईं और अपने कागजात लेकर यहां जमा किये। लेकिन बार बार कोई न कोई अड़चन आ रही थी। वहीं अब करीब पांच वर्ष पूर्व एक बार फिर भारतीय नागरिकता के लिए अप्लाई किया था। जो अब जाकर पूर्ण रूप से मिल गयी है।
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सरकार का शुक्रिया, अपनों ने की काफी मदद फाखरा को भारतीय नागरिकता मिलने के बाद ससुरालीजनों में भी खुशी का माहौल है। उनके परिजनों ने इस दौरान खुशी जाहिर की है। वह सरकार का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। साथ ही बीते वर्षों में नागरिकता पाने के लिए की गई जद्दोजहद को भी याद कर इसे फाखरा की मेहनत की भी जीत बता रहे हैं। फाखरा ने बताया कि वे बीते ३२ साल में पाकिस्तान अपने घर आती जाती रही हैं। लेकिन तीन या चार साल में महीने या दो महीने के लिए ही जाती थीं।
कोट सभी दस्तावेज पूरे होने पर एलआईयू आदि की जांच के बाद शासन को भेज दिए गए थे, जहां से अब उन्हें सरकार द्वारा मान्यता दे दी गई है। शनिवार को फाखरा का नागरिकता का सर्टिफिकेट उसे सौंप दिया गया। - संतोष कुमार सिंह, एसएसपी
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