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बालश्रम छोड़कर बच्चों को शिक्षित कर रहे किशोर

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2020 04:48 PM IST
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प्रभात पांडेय
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साहिबाबाद। लॉकडाउन के दौरान पढ़ाई छोड़कर बाल मजदूरी करने वाले किशोर अब अपनी झुग्गियों में रहने वाले 240 बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। निर्भेद फाउंडेशन ने ऐसे आठ किशोरों की बाल मजदूरी छुड़वाकर उनकी पढ़ाई शुरू कराने का बीड़ा उठाया है। साथ ही झुग्गियों में उनके साथ रहने वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए तीन हजार रुपये प्रतिमाह घर का खर्च चलाने के लिए भी दे रहे हैं। इससे बच्चे शिक्षित हो रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान दिहाड़ी और मजदूरी करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसके चलते इंदिरापुरम क्षेत्र की झुग्गियों में रहने वाले किशोरों ने पढ़ाई छोड़कर बाल मजदूरी शुरू कर दी। निर्भेद फाउंडेशन के साथ जुड़े किशोरों के बारे में जानकारी होने पर फाउंडेशन के सुशील मीणा ने सभी आठ किशोरों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और उनको अपनी ही झुग्गियों में रहने वाले छोटे बच्चों को शिक्षित करने का जिम्मा दे दिया। सुशील मीणा रेलवे में इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की गाइडलाइन के चलते वह अपने सेंटर पर बच्चों को पढ़ाई नहीं करा रहे। उन्होंने बताया कि बाल मजूदरी करने वाले यह आठ किशोर आठवीं से दसवीं कक्षा के छात्र हैं। लॉकडाउन में घर की आर्थिक स्थिति खराब होने पर मजबूरी में काम पर निकल गए। लेकिन पिछले करीब तीन माह से यह छात्र अपनी झुग्गियों में ही रहने वाले 240 बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उन्होंने इस अभियान को मैं भी हूं शिक्षक का शीर्षक दिया है। इसके साथ ही वह झुग्गियों में बढ़ने वाले 240 बच्चों को दो वक्त का खाना भी दे रहे हैं। जिससे शिक्षा के साथ ही बच्चों को भोजन भी मिल रहा है। जिससे उनका भविष्य खराब न हो।
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आठ किशोरों को पढ़ाई के एवज में तीन हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं सुशील मीणा ने बताया कि किशोरों के परिवार का पालन पोषण चलता रहे इसके लिए वह इन सभी आठ किशोरों को प्रतिमाह तीन हजार रुपये भी दे रहे हैं। इससे इन किशोरों की घर की कुछ स्थिति सही रहे। किशोर भी मन लगाकर बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। व्हाट्सएप के जरिए इन किशोरों को रोज बच्चों को पढ़ाने के लिए विषय दिया जाता है। इसके बाद जो छोटे बच्चे पढ़ते हैं। इनकी कॉपी फाउंडेशन के वॉलेंटियर चेक करते हैं।
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किशोरों को भी दी जाती है ऑनलाइन शिक्षा फांउडेशन से जुड़ी बैंक मैनेजर तरुणा बताती हैं कि आठ किशोरों की पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें प्रतिदिन शाम को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लैपटॉप से ऑनलाइन क्लास दिलवाई जाती है। सभी के पास मल्टीमीडिया मोबाइल नहीं है। इसके लिए फाउंडेशन के वॉलेंटियर के लैपटॉप से शिक्षक इन्हें विषय वार क्लास दे रहे हैं। इंदिरापुरम के बाद अब यह मै भी हूं शिक्षक अभियान अन्य केंद्रों पर भी शुरू कराया जाएगा।
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