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खाप की चेतावनीः 26 जनवरी को एक लाख ट्रैक्टर लेकर दिल्ली में घुसेंगे किसान, अब जिद छोड़ दे सरकार

Sat, 09 Jan 2021 12:44 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली/साहिबाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली/साहिबाबाद Published by: गाजियाबाद ब्यूरो Updated Sat, 09 Jan 2021 12:44 AM IST
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Khap warning: Farmers will enter Delhi with one lakh tractors on 26 January
सांकेतिक तस्वीर... - फोटो : amar ujala

आठवें दौर की वार्ता विफल होने के बाद किसानों के तेवर तल्ख हो गए हैं। किसाने ने हुंकार भरी है कि वे कानूनों के खत्म हुए बगैर वापस नहीं जाएंगे और आंदोलन को तेज किया जाएगा। कड़ाके की ठंड के बीच भी किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। 

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इस बीच आंदोलन के 44वें दिन यूपी गेट पर देश खाप के चौधरी सुरेंद्र ने सरकार को चेतावनी दी। कहा कि यदि सरकार तीनों कानून वापस लेकर मांगों को नहीं मानती है तो फिर 26 जनवरी को दिल्ली में किसान एक लाख ट्रैक्टरों के साथ परेड करेंगे। 26 की परेड में जवानों और किसानों को पूरा देश एक साथ देखेगा।
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चौधरी सुरेंद्र ने कहा कि वह जिस खाप का नेतृत्व करते हैं, वहां पर शोषण का प्रवेश निषेद्य है। उन्होंने कहा कि सरकार जब अपनी जिद पर है तो किसान भी सड़कों पर आंदोलन में बैठा है। वहीं, देश खाप के चौ. जोगेंद्र सिंह सरकार को चेतावनी दी। कहा कि ट्रैक्टरों से परेड की तैयारी शुरू कर दी गई है। आंदोलन में पहुंचे खाप के थांबेदार रामकुमार ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों को मानने में जितनी देर कर रही है, उसका उतना ही नुकसान होगा। आंदोलन पर बैठा किसान दो-तीन साल तक भी सड़क से नहीं उठेगा।
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उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि 26 जनवरी को दिल्ली में परेड के दौरान एक लाख ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ बड़ी संख्या में किसान जवानों के साथ शामिल होगा। पूरा देश इस बार जवान और किसान की परेड देखेगा। भाकियू युवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव टिकैत ने कहा कि ट्रैक्टर मार्च जैसा ट्रेलर पूरी दुनिया में कभी किसी ने नहीं देखा होगा। किसानों को पता चला गया है कि दिल्ली अब कब्जे में कैसे आएगी, दिल्ली की नस तो यह पेरिफेरल है और किसान ट्रेलर में यह सीख गया है कि जब भी सरकार की नब्ज दबानी होगी तो पेरिफेरल घेर लो।

उन्होंने सरकार और शासन के अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि वह किसान आंदोलन को बिल्कुल भी हल्के में न लें। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि जब चौ. महेंद्र सिंह टिकैत 350 बार जेल जा सकते हैं तो वह भी सरकार के साथ 350 बार वार्ता कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अगर किसानों को एक-एक किलो सोना भी देेगी तो भी किसान मानने वाला नहीं है। देश का किसान सिर्फ तीनों कानूनों को वापस होने पर ही मानेगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन वैचारिक क्रांति है। इसमें जैसे-जैसे दिन गुजर रहे हैं वैसे ही किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है।

समाजसेवी मेधा पाटकर भी पहुंची यूपी गेट
यूपी गेट पर समाजसेवी मेधा पाटकर ने कहा कि किसान आंदोलन अब सिर्फ यूपी, पंजाब और उत्तराखंड का नहीं रहा। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की आवाज देशभर से आ रहा है। शुक्रवार को नर्मदा नदी संघर्ष समिति के पदाधिकारी भी यूपी गेट पहुंचे। वहां समिति के युवाओं ने ढोल और ढपली बजाकर सरकार के तीनों कानूनों का विरोध किया। इस दौरान युवाओं ने मध्यप्रदेश की संस्कृति की झलक भी दिखाई।


यह सभी किसान रहे भूख हड़ताल पर
किसान नेता जगतार सिंह बाजवा ने बताया कि किसान आंदोलन में लगातार 11 किसान रोजाना भूख हड़ताल पर बैठकर सरकार को तीनों कानून के खिलाफ कड़ा संदेश दे रहे हैं। इनमें नगीना राण, ओकार त्यागी, भीमादित्य, हरप्रसाद, देवेंद्र सिंह, करजीत सिंह, भोग सिंह, राम सिंह और बलदेव सिंह व वकील अहमद शामिल रहे। दोपहर में जिला अस्पताल से डॉक्टरों की टीम ने उनके ब्लडप्रेशर की जांच की।

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