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उत्तराखंड में जिका वायरस से मचा हड़कंप, अलर्ट जारी

Fri, 11 Mar 2016 11:54 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 11 Mar 2016 11:54 AM IST
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zika virus alert in uttarakhand
जीका वायरस - फोटो : concept photos

उत्तराखंड में जिका वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। स्वास्थ्य महानिदेशक डा. कुसुम नरियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिका को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए। विशेषकर पासपोर्ट और एयरपोर्ट अधिकारियों को प्रभावित देशों से आवागमन करने वाले लोगों पर विशेष नजर रखनी होगी।

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बृहस्पतिवार को जिका वायरस को लेकर प्रदेश में पहली ऐहतियातन बैठक आयोजित की गई। स्वास्थ्य महानिदेशालय में
आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य महानिदेशक डा. कुसुम नरियाल ने कहा कि जिका वायरस को लेकर
दुनियाभर में चिंता जताई जा रही है।

उत्तराखंड में भी प्रभावित देशों से लोगों के आने-जाने का सिलसिला लगा हुआ है। ऐसे में उन लोगों पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरुरत है ताकि अन्य लोगों को उसके दुष्प्रभावों से बचाया जा सके। उन्होंने हरिद्वार, ऋषिकेष, मसूरी, देहरादून, नैनीताल समेत अन्य पर्यटक स्थलों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए। बैठक में पासपोर्ट सेवा, एयरपोर्ट ऑथिरिटी, पर्यटन समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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जीका वायरस का खतरा

zika virus alert in uttarakhand
हस्‍तरेखा च‌िक‌ित्‍सक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने विदेशों में तेजी से बढ़ रहे जीका वायरस के खतरे को देखते हुए वैश्विक स्वास्थ्य अपातकाल घोषित किया है। साथ ही आशंका जताई गई है कि उत्तर और दक्षिण अमेरिका महाद्विपों में इस साल इसके 40 लाख मामले सामने आ सकते हैं।

अधिकतर मामलों में इस संक्रमण के लक्षण दिखाई नहीं देंगे, लेकिन इसका असर बच्चों के दिमाग पर पड़ सकता है लेकिन यात्रा या व्यापार पर किसी तरह की पाबंदी की सिफारिश नहीं की गई है।

क्या है जीका वायरस
यह वायरस सबसे पहले यूगांडा के जीका जंगलों के बंदरों में वर्ष 1947 में पाया गया। इसके बाद ही इसका नाम जीका वायरस पड़ा। 1954 में पहली बार किसी इंसान के अंदर ये वायरस देखा गया। 2007 में माइक्रोनेशिया के एक द्वीप याप में इस वायरस ने बड़ी तेजी से पैर पसारे और फिर यह वायरस कैरीबियाई देशों और लैटिन अमेरिका के देशों में फैल गया। इस वायरस का वाहक एडिस एजिप्टी मच्छर है।

काले रंग पर सफेद पट्टियों वाला और करीब 5 मिलीमीटर आकार का अदना सा मच्छर किसी मां के गर्भ में पल रहे बच्चे का दिमाग बनना रोक सकता है और उसके चेहरे का आकार-प्रकार बिगाड़ सकता है। ये मच्छर उसी एडीस नस्ल का है जिसने देश में डेंगू, चिकनगुनिया और यलो फीवर फैलाया है। कई देशों में इस वायरस की दहशत है। एल सैल्वडॉर की सरकार ने तो अगले दो साल तक महिलाओं को गर्भवती नहीं होने की सलाह दी है।

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