भाजपा की वर्चुअल रैली: देहरादून में कांग्रेस ने काले गुब्बारे उड़ाकर, हरिद्वार में एलईडी तोड़कर जताया विरोध
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा की वर्चुअल रैली के विरोध में देहरादून में युवा कांग्रेस की ओर से कांग्रेस भवन में धरना प्रदर्शन कर काले गुब्बारे उड़ाए गए। युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों ने कहा कि इस समय कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के समय भी भाजपा करोड़ों रुपए इन रैलियों को आयोजित करने में लगा रही है, जबकि इतने पैसों से गरीब मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा सकता था।
आरोप लगाया कि भाजपा पीएम केयर फंड एवं मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा हुए पैसों का इस्तेमाल इन रैलियों में कर रहे हैं। जिसका युवा कांग्रेस पुरजोर विरोध करती है। अगर भाजपा द्वारा भविष्य में इस प्रकार की रैलियां निकाली गई तो युवा कांग्रेस सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करेगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश की भाजपा सरकार की होगी। कार्यक्रम में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, राष्ट्रीय सचिव युवा कांग्रेस वैभव वालिया, संगठन महामंत्री विजय सारस्वत, भूपेंद्र नेगी, विजय रतूड़़ी मोंटी, गौतम सोनकर, अजय रावत, पुष्कर सारस्वत, संदीप चमोली आदि मौजूद रहे।
हरिद्वार में एलईडी तोड़कर वर्चुअल रैली का विरोध
भाजपा की ओर से की जा रही वर्चुअल रैलियों को युवा कांग्रेस ने एलईडी तोड़कर विरोध जताया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के गृह वार्ड खन्नानगर के बाहर सिर पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन भी किया।
बुधवार को युवक कांग्रेस के कार्यकारी जिलाध्यक्ष रवि बहादुर के नेतृत्व में कार्यकर्ता एकत्र हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद से समाज का हर वर्ग परेशान है। लाखों लोगों की नौकरियां चली गई। व्यापारियों को व्यापार चौपट हो गया। गरीब जनता के समाने भूखे मरने की नौबत आ गई है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार को इसकी चिंता नहीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह प्रदेशों में वर्चुअल रैली कर रहे। गरीबों की मदद करने और कोरोना मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए सरकार के पास पास नहीं, लेकिन रैलियों पर करोड़ों रुपया बहाया जा रहा है।
पूर्व प्रदेश सचिव अनिल भास्कर ने कहा कि मजदूर पैदल नंगे पांव हजारों किमी चलकर अपने घर तक गए। उनकी मदद के लिए भाजपा के पास पैसा नहीं था, लेकिन चुनावी रैली करने के लिए पैसा है।