Year Ender 2020: शुरूआत में कोरोना अब साइबर ठगों से मिल रही चुनौती
- लॉकडाउन में देवदूत की तरह उभरी उत्तराखंड पुलिस की छवि
- साइबर ठगों से पार पाने में बीत गए साल के अंतिम दो महीने
- साल की शुरूआत में स्कूल में दुष्कर्म की छात्रा को मिला था न्याय
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वर्ष 2020 पुलिस के लिए खासी चुनौतियों भरा रहा। शुरूआती महीनों में कोरोना से चुनौतियों का सामना करती हुई उत्तराखंड पुलिस जब अंतिम महीनों में पहुंची तो हजारों किलोमीटर दूर बैठे साइबर ठग ललकारने लगे। हालांकि लॉकडाउन में चारों ओर पुलिस के कामों की सराहना की गई। इस साल में कई गुडवर्क भी पुलिस के नाम रहे, जिनकी बदौलत पुलिस ने अपनी रणनीति का लोहा मनवाया।
इन सबके बीच एक बात पुलिस के लिए राहत भरी यह रही कि पूरे साल देहरादून में कोई बड़ा अपराध नहीं हुआ। जो पहले हुए उनका खुलासा कर दिया गया। दून पुलिस के नाम कई उपलब्धियां और अभियान रहे। वहीं राजधानी के यातायात सुधार की पहल शहर को रास नहीं आई। अंतत: यातायात के बड़े प्लान को छोड़कर छोटे छोटे सुधार किए गए।
न्याय से हुई थी साल की शुरूआत
इस साल के फरवरी में एक बड़ा फैसला पॉक्सो कोर्ट से आया। बोर्डिंग स्कूल में सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता को न्याय मिला और आठ आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा का ऐलान हुआ। मामला वर्ष 2018 में सामने आया था। इसमें तीन नाबालिग छात्र समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा सहसपुर थाने में दर्ज हुआ था। तीन नाबालिग छात्रों को छोड़कर बाकी आठ आरोपियों को फरवरी माह में सजा सुनाई गई।
लॉकडाउन में देवदूत से हुई पुलिस की तुलना
24 मार्च को कोविड के प्रकोप के चलते लॉकडाउन लग गया, लेकिन पुलिस के थाने चौकी आमजन मानस की सहायता के लिए हर समय खुले थे। विभिन्न सामाजिक संगठन तो लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे थे। साथ ही साथ पुलिस के हर अधिकारी और कर्मचारी ने भी जिम्मा संभाल लिया था। जिले में हजारों लोगों को राशन बांटने से लेकर प्रवासियों को लाने का काम भी पुलिस ने किया। इस सेवाभाव के चलते उत्तराखंड पुलिस की तुलना देवदूत से की गई।
जुलाई में परिवारों पर मौत बनकर गिरा मकान
जुलाई माह में राजधानी में हुए एक दर्दनाक हादसे ने सभी की आंखें नम कर दीं। चुक्खूवाला स्थित एक मकान के अंदर सो रहे दो परिवारों पर यह मकान मौत बनकर गिरा। अंदर सोये दोनों परिवारों के चार लोगों की मौत हो गई। हादसे का कारण एक पुश्ता था, जिसमें पुलिस ने प्लाट के मालिक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया।
प्रदेश पुलिस के मुखिया बदले
प्रदेश पुलिस के मुखिया भी इसी साल बदल गए। तीन साल से अधिक के कार्यकाल के बाद पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी 30 नवंबर को सेवानिवृत्त हो गए। उनके स्थान पर प्रदेश के 11वें डीजीपी अशोक कुमार ने यह जिम्मेदारी संभाली। पुलिस के कल्याण और कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने का वादा लेकर आए डीजीपी अशोक कुमार अब आने वाले कुंभ की चुनौतियों से पार पाने का प्रयास करेंगे। उनके कुर्सी संभालने के कुछ दिन बाद राजधानी के कप्तान और रेंज के आईजी का भी ट्रांसफर हो गया।
साइबर ठगों ने किया जीना मुहाल
राजधानी पुलिस को शहर के भीतर भले ही अपराधियों से चुनौतियां कम मिली हों, लेकिन हजारों किलोमीटर दूर बैठे ठग यहां के लोगों की नींद हराम किए हुए हैं। बीते एक माह के भीतर ही लगभग 60 से ज्यादा शिकायतें साइबर थाना और जिला पुलिस को मिली हैं। एसटीएफ और जिला पुलिस ने तमाम आरोपियों को पकड़ने में कामयाबी भी हासिल की है। साल के अंत में शुरू हुई यह चुनौती अगले साल या उससे भी आगे तक जारी रहने की आशंका है।