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विश्व बैंक की मदद से सुधरेगा हेल्थ सिस्टम

Tue, 02 May 2017 03:34 PM IST
सूरत सिंह रावत/ अमर उजाला, उत्तरकाशी
सूरत सिंह रावत/ अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Tue, 02 May 2017 03:34 PM IST
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world bank recover uttarakhand health system
विश्व बैंक - फोटो : Getty

स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव नशा अशिक्षा व कुपोषण से जिले के मोरी के सुदूरवर्ती गांवों में दिव्यांगों की संख्या बढ़ रही है। अब विश्व बैंक से राज्य को मिलने वाले 620 करोड़ से हेल्थ सिस्टम को प्रभावी बनने की योजना से क्षेत्र वासियों में हालात बदलने की उम्मीद जगी है।

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गांव में प्रसव के दौरान समस्या आए तो 15 से 26 किमी पगंडडी और 200 किमी तक के वाहन से सफर के बाद उन्हें देहरादून पहुंचना पड़ता है। जिला अस्पताल के बाहर ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों के लिए 107 डाक्टरों के पदों के विपरीत 45 डाक्टर ही कार्यरत हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में डाक्टर नहीं है।
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सभी छह डिप्टी सीएमओ के पद खाली है। सरकारी जनगणना कार्यक्रम हो या राज्य स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास उनके पास छह साल तक के बच्चों की गणना तो है, लेकिन विकलांग व 18 साल तक के बच्चों के कोई रिकार्ड नहीं है। कलाप गांव के हाकम सिंह, घुंघर सिंह आंखों से कम देखते हैं। दोनो भाइयों की पत्नी सुवेंद्री भी अंधी है। इनके दस व 12 साल के दो बच्चे समोद आंख से नहीं देखता व मनोज का एक पैर खराब है।
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बरदान सिंह की बेटी सहित गांव में एक दर्जन बच्चे दिव्यांग है। तपेदिक, मिर्गी तथा कृषकाय बच्चे वहां कई मिल जाएंगे। दिव्यांगों की यह स्थिति हडवाड़ी, देवरा, खन्यासणी, सेवा, बरी, नैटवाड़ दणगाण गांव व मसरी भीतरी सहित 20 से ज्यादा गांवों में देखी जा सकती है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता जाज मोहन, प्रहलाद, ठंपी सिंह व खजान दास, उमराव सिंह आदि कहते है कि अब विश्व बैंक की मदद और केंद्र सरकार के बाल विकास मंत्रालय के दिव्यांगों के गोद लेने की मुहिम से क्षेत्र में उम्मीद जगी है।  

                
डाक्टरों तथा फील्ड स्टाफ की कमी तो है ही सुदूरवर्ती गांव तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए निदेशालय व  शासन स्तर पर ही योजना बनेगी। विश्व बैंक के ऋण से बनने वाली योजना तैयार होने के बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जा सकता है कि हेल्थ सिस्टम सुधारने में यह कहां तक सफल हो सकती है।         
- डा. मेजर बचन सिंह, सीएमओ उत्तरकाशी

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