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जिस काम से चलती थी जिंदगी, उसी ने ली जान

Thu, 15 Jan 2015 08:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, श्यामपुर (हरिद्वार)
ब्यूरो/अमर उजाला, श्यामपुर (हरिद्वार) Updated Thu, 15 Jan 2015 08:28 AM IST
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worker died under the tree.

जिस काम के जरिए पांच साल से उसकी रोजी-रोटी चलती थी उसी काम को करते हुए उसने अपनी जिंदगी गंवा दी। हरिद्वार-नजीबाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर वन विकास निगम की ओर से चल रहे पेड़ कटान के दौरान पेड़ के नीचे दबकर एक मजदूर की मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।

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बुधवार को वन विकास निगम के मजदूर गैंडीखाता गांव के पास यूकेलिप्टस के पेड़ों का कटान कर रहे थे। इस दौरान दोपहर तीन बजे के करीब वीरेंद्र रावत पुत्र चंदन रावत निवासी गैंडीखाता जिला हरिद्वार के ऊपर यूकेलिप्टस के एक बड़ा पेड़ गिर गया जिस कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
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प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जैसे ही कटान के दौरान पेड़ उसकी ओर आया तो उसने भागने का प्रयास किया, लेकिन गड्ढे में पैर फिसलने के कारण वह वहीं गिर गया और पेड़ उसके ऊपर आ गिरा। जब तक उसके साथ काम करने वाले मजदूरों ने उसके ऊपर से पेड़ हटाया तब तक वह दम तोड़ चुका था।
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पुलिस ने सूचना के बाद मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। थानाध्यक्ष अनुज सिंह का कहना है कि मृतक के परिजनों की ओर से फिलहाल कोई तहरीर नहीं दी गई है।

विभाग की लापरवाही बनी मौत का सबब

worker died under the tree.

वन विकास निगम की लापरवाही के कारण पिछले पांच वर्षों से विभाग के लिए पेड़ कटान कर रहे वीरेंद्र रावत के लिए मौत का सबब बन गई।

लोगों का आरोप है कि अगर वन विकास निगम की ओर से कायदे अनुसार पेड़ों का कटान किया होता तो शायद वीरेंद्र की जान नहीं जाती।

नियमानुसार पेड़ को पहले आरी आदि से काटा जाता और फिर जेसीबी से उसकी जड़ को जमीन से बाहर निकाला जाता है। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वन विकास निगम पेड़ों के काटने के बजाय जेसीबी के जरिए पेड़ों को उखाड़ रहा था। जिस कारण वीरेंद्र पेड़ के गिरने का अनुमान नहीं लगा पाया और पेड़ उसके ऊपर आ गिरा। जिससे मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया। वीरेंद्र परिवार में अकेला कमाने वाला था। उसके दो लड़के हैं और दोनों नाबालिग हैं।

पेड़ जेसीबी के जरिये नहीं उखाड़े जा रहे थे। यह सिर्फ एक हादसा था। मजदूर के परिजनों को वन विकास निगम की ओर से मुआवजा दिया जाएगा।
-विजयपाल, सेक्सन ऑफिसर, वन विकास निगम हरिद्वार।

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